Southern Rising Summit 2025 में तमिलनाडु के प्रमुख नेताओं ने शिक्षा, भाषा, लोकतंत्र और राज्यों के अधिकारों से जुड़े बड़े मुद्दों पर अपनी स्पष्ट और तीखी राय रखी। शिक्षा मंत्री अंबिल महेश ने कहा कि तमिलनाडु में हर भाषा का स्वागत है, लेकिन किसी भाषा को थोपे जाने का विरोध किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने केंद्र के खिलाफ राज्य अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संदेश दिया।
भाषा थोपने का स्पष्ट विरोध
तमिलनाडु के स्कूल शिक्षा मंत्री अंबिल महेश ने कहा कि सभी भाषाएं सम्मान की पात्र हैं, लेकिन जब किसी भाषा को जबरन लागू करने की कोशिश होती है, तब तमिलनाडु उसका विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि भाषाई विविधता देश की ताकत है और किसी भाषा का थोपना समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
बेहतर समाज के निर्माण पर जोर
अंबिल महेश ने यह भी कहा कि राज्य की नैतिकता सिर्फ आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है। सरकार की प्राथमिकता एक ऐसे समाज का निर्माण करना है, जहां शिक्षा और अवसरों की समान उपलब्धता हो, और जहां हर व्यक्ति के सम्मान और स्वतंत्रता की रक्षा की जाए।
राज्यों के अधिकारों पर स्टालिन का आक्रामक रुख
उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने खुलकर कहा कि जब तक राज्यों के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिशें जारी रहेंगी, तब तक तमिलनाडु दृढ़ता से इसका विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को ‘अधीन’ मानने की मानसिकता लोकतंत्र के लिए खतरा है।
भाषा और लोकतंत्र की रक्षा की प्रतिबद्धता
स्टालिन ने दोहराया कि उनकी पार्टी हमेशा भाषा, क्षेत्रीय अधिकार, लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिकों के वोट के अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी। उनका कहना था कि यह लड़ाई किसी दल की नहीं, बल्कि राज्यों की स्वायत्तता बचाने की लड़ाई है।
आर्थिक-पोलिटिकल संतुलन पर केंद्र पर आरोप
अपने संबोधन में उदयनिधि ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार आर्थिक रूप से मजबूत राज्यों को राजनीतिक रूप से कमजोर करने और राजनीतिक रूप से मजबूत राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल संघीय ढांचे के खिलाफ है और राज्यों के विकास को प्रभावित करता है।