मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने सोमवार को हुई मंत्रिमंडल बैठक में किसानों और पेंशनर्स के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। कैबिनेट ने जहां सोयाबीन किसानों को राहत देने के लिए भावांतर भुगतान योजना को फिर से लागू करने की मंजूरी दी, वहीं राज्य के डेढ़ लाख से ज्यादा पेंशनर्स को भी दिवाली से पहले बड़ा तोहफा दिया है। इसके अलावा कोदो-कुटकी, रेशम उत्पादन और गेहूं उपार्जन से जुड़ी कई नीतियों को भी हरी झंडी दी गई है।
किसानों को सोयाबीन पर भावांतर योजना का लाभ
राज्य सरकार ने किसानों की आय में स्थिरता लाने के लिए भावांतर भुगतान योजना को पुनः लागू करने का फैसला लिया है। इस योजना के तहत यदि किसान अपना सोयाबीन न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दर पर बेचते हैं, तो सरकार उन्हें यह नुकसान भरपाई के रूप में देगी।
सोयाबीन का एमएसपी ₹5328 प्रति क्विंटल तय किया गया है। कृषि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि सरकार मंडियों के मॉडल रेट के अनुसार भावांतर राशि का भुगतान करेगी। इसके लिए किसानों को योजना में पंजीयन करवाना अनिवार्य होगा।
पेंशनर्स को महंगाई राहत का लाभ
मोहन कैबिनेट ने राज्य के करीब 1.5 लाख पेंशनर्स को राहत देने का निर्णय लिया है। सरकार ने छठे और सातवें वेतनमान के आधार पर पेंशन एवं पारिवारिक पेंशन में महंगाई राहत (DA) बढ़ाने की मंजूरी दी है। लंबे समय से लंबित यह मांग पूरी होने से पेंशनर्स को दिवाली से पहले अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलेगा।
कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े अन्य फैसले
वर्ष 2025-26 में कोदो-कुटकी उपार्जन के लिए “रानी दुर्गावती श्री अन्न प्रोत्साहन योजना” लागू की जाएगी।
रेशम उत्पादन का लागत मूल्य ₹3.65 लाख प्रति एकड़ से बढ़ाकर ₹5 लाख किया गया है।
वर्ष 2023-24 के समर्थन मूल्य पर चमक-विहीन गेहूं की प्रतिपूर्ति का अनुमोदन भी दिया गया।
विधायक मधु वर्मा को CPR देने वाले आरक्षक अरुण भदौरिया को आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन देने की मंजूरी मिली।