SP-Congress Prepare For 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि सबसे बड़ा सवाल अब सीट शेयरिंग के फॉर्मूले को लेकर खड़ा हो गया है। दोनों दल 2024 लोकसभा चुनाव की सफल साझेदारी को आगे बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं।
अखिलेश ने दिया जीत वाला फॉर्मूला
अखिलेश यादव लगातार कह रहे हैं कि गठबंधन में सीटों की संख्या नहीं बल्कि जीत अहम होगी। सपा चाहती है कि जिन सीटों पर उसका मजबूत कैडर है या जहां पार्टी 2022 विधानसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रही थी, वहां समझौता न किया जाए। सपा का फोकस अपने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत रखते हुए अधिकतर सीटों पर दावा बनाए रखने का है।
कांग्रेस भी बढ़ाना चाहती है दायरा
2024 लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के बाद कांग्रेस का आत्मविश्वास बढ़ा है। राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी यूपी में अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। कांग्रेस अमेठी, रायबरेली, प्रयागराज और सहारनपुर जैसे क्षेत्रों की सीटों पर खास फोकस कर रही है। पार्टी 100 से 120 विधानसभा सीटों पर संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार कर रही है ताकि सीट बंटवारे के दौरान मजबूत दावेदारी पेश की जा सके।
2017 और 2024 दोनों मॉडल चर्चा में
सपा और कांग्रेस इससे पहले 2017 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव साथ लड़ चुके हैं। 2017 में दोनों दलों का गठबंधन उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाया था। वहीं 2024 में दोनों की साझेदारी सफल रही और बीजेपी को कई सीटों पर कड़ी चुनौती मिली। इसी कारण अब चर्चा इस बात की है कि 2027 में सीट बंटवारा 2017 के पुराने फॉर्मूले पर होगा या फिर 2024 की जीत वाली रणनीति को आधार बनाया जाएगा।
सोशल इंजीनियरिंग बनेगी असली आधार
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 में सपा-कांग्रेस गठबंधन की असली बुनियाद सोशल इंजीनियरिंग होगी। सपा जहां पिछड़ा, दलित और मुस्लिम वोट बैंक को साधना चाहती है, वहीं कांग्रेस ब्राह्मण, दलित और अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रही है। ऐसे में दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों का भी बड़ा खेल बनने जा रहा है।