UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों की नजर उन क्षेत्रों पर है, जहां उनका संगठन, स्थानीय नेतृत्व और चुनावी आधार मजबूत माना जाता है। सहारनपुर से लेकर रायबरेली, अमेठी, बाराबंकी और सीतापुर तक कई सीटें ऐसी हैं, जहां दोनों पार्टियों की दावेदारी सामने आ रही है। ऐसे में सीटों का बंटवारा गठबंधन के लिए अहम मुद्दा बन गया है।
सहारनपुर में सबसे ज्यादा खींचतान
सहारनपुर सीटों के लिहाज से दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की क्षेत्र में सक्रियता के बीच पार्टी विधानसभा स्तर पर भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के पास जिले में अपना संगठन और कई सीटों पर मजबूत स्थानीय दावेदार हैं। ऐसे में गठबंधन की स्थिति में किस दल को कौन-सी सीट मिलेगी, यह सवाल स्थानीय नेताओं के लिए भी अहम हो गया है।
रायबरेली में सपा-कांग्रेस की अलग-अलग तैयारी
रायबरेली कांग्रेस के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र रहा है। वहीं समाजवादी पार्टी भी यहां अपना संगठन मजबूत करने में जुटी है। अखिलेश यादव ने रायबरेली से पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत कर पार्टी की राजनीतिक सक्रियता का संदेश दिया है। विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे की स्थिति बनने पर दोनों दलों की स्थानीय ताकत और मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखा जाना तय माना जा रहा है।
अमेठी पर भी दोनों की नजर
अमेठी का नाम भी उन क्षेत्रों में शामिल है, जहां सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के स्थानीय स्तर पर अलग-अलग दावे सामने आ सकते हैं। कांग्रेस का यहां पुराना राजनीतिक आधार रहा है, जबकि सपा भी संगठन और कार्यकर्ताओं के जरिए अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में दोनों दलों के संभावित उम्मीदवारों की उम्मीदें भी गठबंधन की बातचीत के नतीजे पर टिकी हुई हैं।
बाराबंकी और सीतापुर में संगठन की परीक्षा
बाराबंकी और सीतापुर में भी सीटों को लेकर तस्वीर आसान नहीं है। बाराबंकी में सपा का स्थानीय संगठन सक्रिय है, जबकि कांग्रेस भी अपने राजनीतिक आधार के हिसाब से हिस्सेदारी चाहती है। सीतापुर में भी दोनों दल अपने संभावित उम्मीदवारों और संगठन की स्थिति को आधार बनाकर सीटों पर दावा कर सकते हैं। यही वजह है कि इन जिलों की सीटें बातचीत में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
जीत की संभावना बनेगी सीट बंटवारे का आधार?
अभी दोनों दलों के बीच सीटों का अंतिम फॉर्मूला सार्वजनिक नहीं हुआ है। कांग्रेस अधिक सीटों की तैयारी में है, जबकि सपा की ओर से जीत की संभावना और स्थानीय समीकरणों को अहम आधार माना जा रहा है। ऐसे में बातचीत सिर्फ सीटों की संख्या तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हर सीट पर उम्मीदवार, संगठन और पिछले चुनावी प्रदर्शन जैसे पहलुओं पर भी चर्चा होगी। अब नजर इस बात पर है कि दोनों दल अपने-अपने दावेदारों को संतुष्ट करते हुए किस तरह सीटों पर सहमति बनाते हैं।