
Undeclared emergency in UP: बरेली हिंसा के बाद हालात जानने जा रहे समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों और नेताओं को प्रशासन ने रोक दिया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर गठित प्रतिनिधिमंडल के सदस्य कैराना सांसद इकरा हसन, रामपुर सांसद मोहिबुल्लाह नदवी और मुजफ्फरनगर सांसद हरेंद्र मलिक को दिल्ली-गाजियाबाद बार्डर पर रोक लिया गया। वहीं संभल सांसद जियाउर्रहमान बर्क को उनके घर पर ही हाउस अरेस्ट कर दिया गया है। उनके आवास पर आधी रात से पुलिस तैनात है।
“जनप्रतिनिधियों को जनता से मिलने नहीं दिया जा रहा” — इकरा हसन
दिल्ली-गाजियाबाद बार्डर पर रोकी गईं इकरा हसन ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “यूपी में अघोषित इमरजेंसी जैसे हालात हैं। जनप्रतिनिधियों को जनता से मिलने नहीं दिया जा रहा।” उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ बरेली के लोगों से मिलना और हालात समझना था, लेकिन प्रशासन उन्हें रोक रहा है। इकरा ने कहा, “आई लव मोहम्मद पर आपत्ति क्यों है, यह समझ से परे है। सत्ता से बाहर होने का डर सरकार को अब साफ दिख रहा है।”
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संभल सांसद बोले—“अगर हालात सामान्य हैं तो रोक क्यों?”
वहीं घर पर नजरबंद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि यदि बरेली में स्थिति सामान्य है, तो प्रतिनिधिमंडल को रोकने का क्या औचित्य है। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि सरकार असलियत सामने आने से डर रही है। बता दें कि अखिलेश यादव ने 14 सदस्यीय सपा प्रतिनिधिमंडल को बरेली भेजने का आदेश दिया था, जिसमें सांसद, विधायक और पूर्व मंत्री शामिल थे, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अनुमति नहीं दी।