space return shubhanshu: भारत के लिए ऐतिहासिक दिन:करीब 41 साल बाद कोई भारतीय अंतरिक्ष से धरती पर लौट रहा है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला आज अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से 18 दिन की सफल यात्रा के बाद पृथ्वी पर वापस लौटेंगे। एक्सिओम-4 मिशन के तहत उन्होंने तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर स्थित ISS में कई अहम वैज्ञानिक प्रयोग किए। ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट से अनडॉकिंग सफल रही है और आज दोपहर 3 बजे तक उनके अमेरिका के कैलिफोर्निया तट पर उतरने की संभावना है।
ISS की रफ्तार करीब 28,000 किलोमीटर प्रति घंटा होती है, जिससे यह हर 90 मिनट में पृथ्वी की परिक्रमा करता है। इसी कारण शुभांशु शुक्ला ने हर दिन अंतरिक्ष से 16 सूर्योदय और सूर्यास्त देखे। उन्होंने इस अनुभव को अविश्वसनीय बताया है और कहा है कि अंतरिक्ष में बिताया हर पल रोमांच और शोध से भरा हुआ था।
शोध और प्रयोगों से भरा रहा मिशन
25 जून को शुरू हुआ एक्सिओम-4 मिशन वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। इस दौरान शुभांशु शुक्ला ने भारत-विशेष माइक्रोग्रैविटी प्रयोग किए, जो भविष्य के मानव मिशनों और दीर्घकालिक अंतरिक्ष प्रवास के लिए बेहद जरूरी डेटा उपलब्ध कराएंगे। प्रयोगों में जीरो ग्रैविटी में मानव शरीर की प्रतिक्रिया, अंकुरण प्रक्रिया और पौधों की वृद्धि पर अध्ययन शामिल रहा। कुल मिलाकर अंतरिक्ष में 31 देशों के 60 प्रयोग किए गए।
भारत के लिए क्यों है यह मिशन खास
यह मिशन इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि राकेश शर्मा के बाद कोई भारतीय पहली बार अंतरिक्ष में गया। शुभांशु शुक्ला ना केवल अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन तक पहुंचे, बल्कि भारत के पहले प्रतिनिधि के रूप में वहां सक्रिय भूमिका निभाई। उनका अनुभव भारत के 'गगनयान' मिशन की तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही, यह मिशन युवाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में प्रेरित करेगा।
वैश्विक साझेदारी का प्रतीक बना मिशन
इस मिशन में भारत के अलावा हंगरी और पोलैंड भी शामिल थे, जिससे यह मिशन वैश्विक सहयोग और तकनीकी साझेदारी का प्रतीक बन गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के बहुराष्ट्रीय मिशन भविष्य में और तेजी से होंगे, जिससे अंतरिक्ष अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी।