Space Weapons : अंतरिक्ष को अब सिर्फ सैटेलाइट और खोजबीन तक सीमित नहीं माना जा रहा है। हाल ही में अमेरिका ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर बताया कि उसके पास कक्षा में तैनात स्पेस कंट्रोल हथियार मौजूद हैं। हालांकि इन हथियारों की सही तकनीक, संख्या और तैनाती की तारीख के बारे में जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि अंतरिक्ष में हथियार पहुंचते कैसे हैं और क्या इन्हें धरती से ही नियंत्रित किया जा सकता है।
अंतरिक्ष में किस तरह के हथियार होते हैं
अंतरिक्ष से जुड़े सैन्य हथियारों को मोटे तौर पर दो तरह से समझा जा सकता है। पहले वे हथियार हैं जो किसी सैटेलाइट या दूसरे लक्ष्य को सीधे नुकसान पहुंचा सकते हैं। इन्हें काइनेटिक सिस्टम कहा जाता है। दूसरी श्रेणी में ऐसे सिस्टम आते हैं जो किसी वस्तु को सीधे नष्ट किए बिना उसके सिग्नल को बाधित या प्रभावित कर सकते हैं। इनमें जैमिंग, सिग्नल में छेड़छाड़ और कुछ तरह के लेजर सिस्टम शामिल हो सकते हैं।
हथियार अंतरिक्ष तक पहुंचते कैसे हैं
ऐसे सिस्टम को अंतरिक्ष तक पहुंचाने के लिए रॉकेट और दूसरे अंतरिक्ष यान का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक तरीका ऐसा है जिसमें जमीन से छोड़ी गई मिसाइल सीधे किसी सैटेलाइट को निशाना बनाती है। दूसरे तरीके में कोई अंतरिक्ष यान पहले से कक्षा में भेजा जाता है। जरूरत पड़ने पर वह दूसरे अंतरिक्ष यान के करीब जाकर अपना काम कर सकता है। इसी तरह की क्षमताओं को को-ऑर्बिटल सिस्टम के तौर पर समझा जाता है।
क्या इन्हें धरती से रिमोट कंट्रोल किया जाता है
हां, अंतरिक्ष में मौजूद सैन्य सिस्टम को जमीन पर बने नियंत्रण केंद्रों से कमांड भेजी जा सकती है। जिस तरह सामान्य सैटेलाइट को धरती से निर्देश दिए जाते हैं, उसी तरह सैन्य अंतरिक्ष प्रणालियां भी संचार नेटवर्क के जरिए निर्देश हासिल कर सकती हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति सीधे रिमोट की तरह हर गतिविधि को पल-पल नियंत्रित करता है। सिस्टम में पहले से तय कमांड और स्वचालित प्रक्रियाएं भी हो सकती हैं।
क्या हर हथियार खुद फैसला लेता है
ऐसा जरूरी नहीं है। किसी सिस्टम का कितना हिस्सा इंसानी नियंत्रण में रहेगा और कितना स्वचालित होगा, यह उसकी तकनीक और सैन्य व्यवस्था पर निर्भर करता है। कुछ अंतरिक्ष प्रणालियां खतरे की जानकारी जुटाने और उसका जवाब देने में स्वचालित तकनीक का इस्तेमाल कर सकती हैं। लेकिन किसी वास्तविक सैन्य कार्रवाई में कमांड और नियंत्रण की भूमिका बेहद अहम रहती है।
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अंतरिक्ष में हथियारों को लेकर क्यों बढ़ी चिंता
अंतरिक्ष में सैटेलाइट आज संचार, नेविगेशन, मौसम और सैन्य गतिविधियों के लिए बेहद जरूरी हैं। इसलिए किसी सैटेलाइट को नुकसान पहुंचाने या उसका सिग्नल बाधित करने की क्षमता का असर धरती पर भी पड़ सकता है। 1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी अंतरिक्ष में परमाणु हथियार और दूसरे सामूहिक विनाश वाले हथियार तैनात करने पर रोक लगाती है, लेकिन पारंपरिक हथियारों पर इसकी पाबंदी उतनी व्यापक नहीं है। इसी वजह से अंतरिक्ष में सैन्य गतिविधियों को लेकर दुनिया में नई बहस तेज हो रही है।