Wakf Amendment Act: वक्फ को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज फिर सुनवाई होने वाली है. सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने वक्फ बिल को चुनौती देने वाली याचिकाओं के पक्ष में दलीलें दीं. उनको सुनते हुए लिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार की तरफ से तर्क रखे. जिस पर एक बात लगभग साफ हो गई है कि वक्फ कानून रोकने को सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है.. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यानी CJI जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने उनसे तीखे सवाल पूछे. कोर्ट ने अगले आदेश तक यथास्थिति बहाल रखने को कहा है. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन कानून को चुनौती दी गई है. जिसको लेकर सोमवार को सुनावई होना निर्धारित है..
इन आधारों पर दी गई है चुनौती
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन कानून को संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 29 और 30 के तहत चुनौती दी गई है.. जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि धर्म एक निजी मामला है. इसलिए में इसमें सरकार दखल नहीं होना चाहिए.. देश के कई गैर सरकारी संगठनों, मुस्लिम संगठनों और विपक्षी कांग्रेस समेत कई लोगों ने इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दे रखी थी..
वक्फ कानून अनुच्छेद 25 का उल्लंघन क्या?
दरअसल, सरकार द्वारा वक्फ कानून को लोकसभा और राज्यसभा में बहुमत से पास होने के बाद देश में इसके खिलाफ कई याचिकाएं दाखिल की गई. जिनमें से कुछ याचिकाओं की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल कर रहे हैं. याचिकाओं में कहा गया है कि सभी को परंपराओं का पालन करने और उसका प्रचार करने का अधिकार है. साथ ही किसी भी धार्मिक प्रथा से जुड़ी किसी भी वित्तीय, आर्थिक, राजनीतिक या अन्य धर्मनिरपेक्ष गतिविधि को नियंत्रित और प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता. ये अनुच्छेद अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संपत्ति और संस्थानों का प्रबंध करने का अधिकार देता है..