24 जून को भारतीय शेयर बाजार ने धमाकेदार शुरुआत की और दिनभर के कारोबार में ऐतिहासिक तेजी दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,000 अंकों से ज्यादा उछलकर 82,900 के करीब पहुंचा, वहीं निफ्टी 50 ने अक्टूबर 2024 के बाद पहली बार 25,250 का आंकड़ा पार किया। इस बुलेट रैली के पीछे कई ग्लोबल फैक्टर्स रहे, जिनमें ईरान-इजरायल युद्धविराम, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और वैश्विक बाजारों की मजबूती शामिल हैं। इस तेजी से निवेशकों की झोली भर गई और बीएसई का कुल मार्केट कैप 5 लाख करोड़ रुपए बढ़ गया।
ईरान-इजरायल युद्धविराम ने दी राहत
शेयर बाजार में उछाल का सबसे बड़ा कारण ईरान और इजरायल के बीच युद्धविराम समझौता रहा, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषित किया। यह तनाव पिछले दो हफ्तों से वैश्विक निवेशकों के लिए चिंता का कारण बना हुआ था, लेकिन युद्धविराम की खबर ने बाजार की धारणा को एकदम बदल दिया।
सस्ता हुआ तेल, भारत को बड़ा फायदा
युद्धविराम के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 3.4% तक की गिरावट आई और यह $66.15 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो 11 जून के बाद का सबसे निचला स्तर है। तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसी आयातक अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है क्योंकि इससे मुद्रास्फीति पर दबाव घटेगा और राजकोषीय घाटा नियंत्रित रहेगा।
ग्लोबल मार्केट में उछाल का असर भारत पर भी
एशिया-पैसिफिक मार्केट्स में तेजी का असर भारत पर भी दिखा। MSCI Asia-Pacific इंडेक्स (जापान को छोड़कर) में 1.8% की बढ़त, जापान का निक्केई 1.4%, चीन का ब्लू-चिप इंडेक्स 1% और हांगकांग का हैंग सेंग 1.7% उछला। इस तेजी ने भारतीय निवेशकों में भी उत्साह भरा।
रुपया मजबूत, डॉलर कमजोर
डॉलर इंडेक्स में कमजोरी आने से अमेरिकी डॉलर में 0.3% की गिरावट आई, जिससे भारतीय रुपया 65 पैसे चढ़कर 86.13 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। मजबूत रुपया विदेशी निवेशकों को आकर्षित करता है, जो बाजार में और तेजी का कारण बनता है।
बाजार की चौतरफा खरीदारी से निवेशकों की चांदी
सिर्फ सेंसेक्स और निफ्टी ही नहीं, बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 1% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स जैसे निफ्टी बैंक, IT, मेटल, ऑटो और ऑयल एंड गैस में 1-2% तक की उछाल देखने को मिली। इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में 5 लाख करोड़ रुपए का इजाफा हुआ और कुल मार्केट कैप 453 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया।
निवेशकों के लिए संकेत: सतर्कता के साथ निवेश
हालांकि बाजार में तेजी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर नजर बनाए रखना जरूरी है। अगर युद्धविराम कायम रहता है और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो बाजार में आगे और भी तेजी देखी जा सकती है।