भारतीय शेयर बाजार में लगातार आठवें सप्ताह गिरावट देखने को मिल रही है। बाजार में जारी इस कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। लंबे समय तक चली यह गिरावट इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इतनी लंबी साप्ताहिक गिरावट का सिलसिला करीब 25 सालों के बाद देखने को मिला है। बाजार के इस प्रदर्शन से संकेत मिल रहा है कि निवेशकों के बीच अभी भी पूरी तरह भरोसा नहीं लौटा है और बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता
बीते कुछ हफ्तों में सेंसेक्स और निफ्टी में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और कंपनियों के प्रदर्शन से जुड़ी चिंताओं का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है। इसके अलावा जियोपॉलिटिकल तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों के जोखिम को लेकर सतर्क रुख को मजबूत किया है।
लगातार गिरावट ने बढ़ाई चिंता
शेयर बाजार में एक-दो सप्ताह की कमजोरी को सामान्य उतार-चढ़ाव माना जाता है, लेकिन लगातार आठ सप्ताह तक गिरावट का सिलसिला निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। बाजार में लंबे समय से बिकवाली का दबाव रहने के कारण निवेशक अब किसी मजबूत ट्रिगर का इंतजार कर रहे हैं, जिससे बाजार की दिशा में बदलाव आ सके।
विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में किसी भी तेजी के लिए विदेशी निवेश, कंपनियों के तिमाही नतीजे, वैश्विक बाजारों का रुख और आर्थिक आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों के बीच जोखिम लेने की क्षमता पहले जैसी नहीं दिख रही है।
विदेशी निवेशकों की भूमिका अहम
भारतीय इक्विटी बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां लंबे समय से बाजार की दिशा को प्रभावित करती रही हैं। जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में खरीदारी करते हैं तो बाजार को सपोर्ट मिलता है, जबकि लगातार बिकवाली से दबाव बढ़ता है। ऐसे में आने वाले दिनों में विदेशी निवेश का रुख बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने कई मौकों पर बाजार में गिरावट को सीमित करने में मदद की है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के बीच बाजार में स्थिरता लौटने के लिए व्यापक स्तर पर सकारात्मक संकेतों की जरूरत होगी।
क्या आगे भी जारी रहेगी कमजोरी?
लगातार आठ सप्ताह की गिरावट के बाद निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि बाजार कब स्थिर होता है। बाजार में गिरावट के बाद कुछ स्तरों पर खरीदारी लौट सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि तेजी का नया दौर तुरंत शुरू हो जाएगा। आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, केंद्रीय बैंकों की नीतियां, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों का रुख और कंपनियों के वित्तीय नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम रहेंगे। फिलहाल लगातार आठ सप्ताह की गिरावट ने यह जरूर स्पष्ट कर दिया है कि बाजार में डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और निवेशक अभी भी सतर्क रुख अपना रहे हैं।