मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 के दौरान आज सदन का माहौल अचानक गर्म हो गया, जब भोपाल और इंदौर में हुई कथित पत्थरबाजी की घटनाओं पर चर्चा की मांग को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। तीखी नोकझोंक और शोर-शराबे के बीच स्थिति ऐसी बनी कि अध्यक्ष को कार्यवाही थोडी देर के लिए स्थगित करनी पड़ी। सदन में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लंबे समय तक चलता रहा।
ध्यानाकर्षण के जरिए उठा मुद्दा
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडे ने भोपाल और इंदौर में पार्टी कार्यकर्ताओं पर हुए हमलों को लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों शहरों में सुनियोजित तरीके से पत्थरबाजी की गई और महिला कार्यकर्ता भी घायल हुई हैं। इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग की गई।
संसदीय कार्य मंत्री का बयान
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इंदौर और भोपाल में पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले गंभीर विषय हैं और सदन को इस पर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शनिवार और रविवार होने के कारण औपचारिक सूचना देने में देरी हुई, लेकिन मामला अत्यंत संवेदनशील है और इस पर सदन में जवाब जरूरी है।
कांग्रेस का पलटवार
विपक्ष की ओर से कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके पार्टी कार्यालय पर भी हमले हुए हैं। उन्होंने कहा कि एकतरफा चर्चा से सच्चाई सामने नहीं आएगी। कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की घटनाओं पर भी समान रूप से चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने इसे गलत परंपरा बताते हुए संतुलित बहस की मांग की।
हंगामे के बीच स्थगित हुई कार्यवाही
दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और नारेबाजी के चलते सदन का माहौल शोरगुल में बदल गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी। बाद में कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन राजनीतिक तल्खी बरकरार रही।
राजनीतिक संदेश और आगे की रणनीति
विधानसभा में हुई यह तनातनी स्पष्ट संकेत देती है कि आगामी दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और गरमा सकता है। दोनों दल अपने-अपने कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगा रहे हैं, जिससे प्रदेश की राजनीति में टकराव की स्थिति बनी हुई है। आने वाले सत्रों में इस विषय पर विस्तृत चर्चा और सरकार की ओर से आधिकारिक जवाब की संभावना जताई जा रही है।