मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया है। यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के ऊर्जा व्यापार की सबसे अहम कड़ी माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से दुनिया के कई देशों तक पहुंचता है। ऐसे में यहां तनाव या अवरोध का असर सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य और क्यों है इतना अहम
होर्मुज जलडमरूमध्य Iran और Oman के बीच स्थित एक संकीर्ण समुद्री मार्ग है। यह रास्ता Persian Gulf को Arabian Sea से जोड़ता है। वैश्विक स्तर पर तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर विभिन्न देशों तक पहुंचता है।
161 किलोमीटर लंबा, लेकिन सबसे संकरा समुद्री रास्ता
इस समुद्री मार्ग की कुल लंबाई लगभग 161 किलोमीटर है, जबकि इसका सबसे संकरा हिस्सा केवल 33 से 34 किलोमीटर चौड़ा है। सीमित चौड़ाई और भारी जहाजों की आवाजाही के कारण इसे दुनिया के सबसे संवेदनशील ‘चोक पॉइंट’ में गिना जाता है। अगर यहां किसी कारण से जहाजों की आवाजाही रुक जाए तो अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तुरंत उथल-पुथल शुरू हो सकती है।
भारत तक पहुंचने में कितना समय लगता है
होर्मुज से भारत के पश्चिमी तट तक पहुंचने में जहाजों को आमतौर पर 2 से 3 दिन का समय लगता है। समुद्री दूरी और जहाज की गति के आधार पर यह समय अलग-अलग हो सकता है। भारत के प्रमुख बंदरगाहों में से एक Kandla Port तक होर्मुज से लगभग 1000 किलोमीटर की दूरी है। यदि जहाज की औसत गति करीब 27 से 28 किलोमीटर प्रति घंटे मानी जाए, तो यहां पहुंचने में लगभग 37 घंटे लगते हैं।
मुंबई तक जहाजों को लगते हैं करीब 53 घंटे
भारत के सबसे बड़े व्यापारिक बंदरगाहों में से एक Mumbai तक होर्मुज से समुद्री दूरी करीब 1500 किलोमीटर है। तेल टैंकर और बड़े कार्गो जहाज आमतौर पर 24 से 31 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हैं। इसी आधार पर अनुमान लगाया जाए तो जहाजों को मुंबई के तट तक पहुंचने में लगभग 50 से 53 घंटे का समय लग सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है यह रास्ता
ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। अगर यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो तेल की कीमतों में तेजी और कई देशों में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है। यही वजह है कि इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा और खुला रहना दुनिया के कई देशों के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद जरूरी माना जाता है।