नई दिल्ली: देशभर में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अहम सुनवाई हुई। तीन महीने पहले जारी किए गए आदेशों का पालन न होने पर अदालत ने सख्त नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि अब यह देखा जाएगा कि राज्यों ने कितनी गंभीरता से दिशा-निर्देशों का पालन किया है। इस मुद्दे पर अगली सुनवाई 7 नवंबर को होगी।
राज्यों के मुख्य सचिवों की हुई पेशी
सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव पेश हुए। अदालत ने कहा कि अब यह जांच की जाएगी कि पहले दिए गए आदेशों का कितना पालन हुआ है। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आगे से मुख्य सचिवों की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी।
7 नवंबर को आएगा नया आदेश
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि 7 नवंबर को इस मामले पर नया आदेश पारित किया जाएगा। अदालत ने राज्यों से आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों और पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियमों के पालन की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही कोर्ट ने पीड़ितों को अभियोग दायर करने की अनुमति भी दी है।
तीन महीने पहले दिया था पालन का आदेश
अदालत ने तीन महीने पहले सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि वे आवारा कुत्तों के हमलों को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाएं। लेकिन कई राज्यों ने इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया और कहा कि अब देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाने की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह समस्या केवल एक राज्य की नहीं, बल्कि पूरे देश की है। इसलिए एक समान राष्ट्रीय नीति बनाना जरूरी है। अदालत ने राज्यों से इस दिशा में अपने सुझाव देने को कहा है, ताकि देशभर में एबीसी नियमों का प्रभावी कार्यान्वयन किया जा सके।