उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए एकल शिक्षक वाले प्राथमिक विद्यालयों में अतिरिक्त शिक्षकों की तैनाती को लेकर शासन सख्त रुख अपना रहा है। अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थसारथी सेन शर्मा ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) और सहायक निदेशक बेसिक (एडी बेसिक) को कड़ी फटकार लगाते हुए 31 दिसंबर 2025 तक इस प्रक्रिया को पूरा करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही
शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में कहा कि प्रदेश में अभी भी हजारों परिषदीय विद्यालय ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक कार्यरत है या कोई शिक्षक नहीं है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने यू-डायस पोर्टल के डेटा के आधार पर अतिरिक्त शिक्षकों वाले स्कूलों से सरप्लस शिक्षकों को स्थानांतरित कर एकल शिक्षक वाले स्कूलों में तैनाती सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में कई जिलों के अधिकारियों की तैयारी पर असंतोष जताते हुए फटकार लगाई गई और चेतावनी दी कि समय सीमा का पालन न होने पर कार्रवाई होगी।
इंट्रा-डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू की गई थी
बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार नवंबर में जारी दिशा-निर्देशों के तहत इंट्रा-डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू की गई थी। मानव संपदा पोर्टल पर प्रगति की मॉनिटरिंग हो रही है। प्रदेश में करीब 4000 से अधिक एकल शिक्षक वाले स्कूल चिह्नित किए गए हैं। अतिरिक्त शिक्षकों की तैनाती से हर स्कूल में कम से कम दो शिक्षक हो सकेंगे, जिससे पढ़ाई-लिखाई और अन्य गतिविधियां सुचारू रूप से चल सकेंगी। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति और बच्चों के मौलिक अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। एकल शिक्षक वाले स्कूलों में बहु-कक्षा शिक्षण की समस्या आम है, जिससे सीखने का स्तर प्रभावित होता है। विभाग ने बीएसए को निर्देश दिया है कि 31 दिसंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत करें। देरी करने वाले अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।