कोलकाता में स्ट्रॉन्गरूम के बाहर शुरू हुआ विवाद देर रात तक सियासी टकराव में बदल गया। तृणमूल कांग्रेस ने पोस्टल बैलट में छेड़छाड़ के आरोप लगाए, जिसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं और धरना शुरू हुआ। बढ़ते तनाव और आरोप-प्रत्यारोप के बीच चुनाव आयोग को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है।
ई-मेल से शुरू हुआ विवाद
गुरुवार शाम तक स्थिति सामान्य थी, लेकिन एक ई-मेल के बाद विवाद खड़ा हो गया। सूचना दी गई कि शाम 4 बजे स्ट्रॉन्गरूम खोला जाएगा। तृणमूल नेताओं को जब मौके पर पहुंचने के बावजूद अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली, तो उन्होंने इस पर गंभीर सवाल उठाए। पार्टी ने इसे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के खिलाफ बताया।
धरना और ममता बनर्जी की एंट्री
मामला बढ़ते ही पार्टी नेताओं ने स्ट्रॉन्गरूम के बाहर धरना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी वहां पहुंचीं और करीब तीन घंटे तक मौजूद रहीं। उन्होंने समर्थकों से निगरानी बनाए रखने की अपील की, जिससे मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई।
सुरक्षा और अधिकारों पर टकराव
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि शुरुआत में उन्हें अंदर जाने से रोका गया। बाद में उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए प्रवेश किया। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार होने के नाते उन्हें स्ट्रॉन्गरूम के बाहर तक जाने का अधिकार है। इस दौरान उन्होंने कई अनियमितताओं की आशंका भी जताई।
बीजेपी का पलटवार और बढ़ता तनाव
घटनास्थल पर माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहा। तृणमूल और बीजेपी समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्ष ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक नाटक बताया और कहा कि यह जनता को गुमराह करने की कोशिश है।
चुनाव आयोग की सफाई
विवाद बढ़ने पर चुनाव आयोग ने देर रात प्रेस कॉन्फ्रेंस की। आयोग ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पोस्टल बैलट की छंटनी एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा थी और इसकी जानकारी पहले ही दी जा चुकी थी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि स्ट्रॉन्गरूम पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हुई है।