देश की खुफिया एजेंसी RAW ने कई जांबाज एजेंट दिए, लेकिन एक नाम ऐसा भी थी जिसने RAW के इतिहास पर दाग लगा दिया, जिसका नाम है रविंद्र सिंह, जो एक ऐसे रॉ अधिकारी रहे कि देशद्रोही बन गए और अमेरिका भाग गए. जिसकी कहानी आपको भी हैरान कर देगी
ऑपरेशन ब्लू स्टार में लिया हिस्सा
दरअसल रॉ अधिकारी रहे रविंद्र सिंह का जन्म पंजाब के अमृतसर में एक जाट सिख जमींदार परिवार में हुआ. उन्होंने भारतीय सेना में एक अधिकारी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और ऑपरेशन ब्लू स्टार में हिस्सा लिया. बाद में वो रॉ में शामिल हुए. जहां उन्हें संयुक्त सचिव के पद तक पहुंचने का मौका मिला. उनकी तैनाती पाकिस्तान, पश्चिमी एशिया और नीदरलैंड्स जैसे संवेदनशील इलाकों में हुई. जहां उनकी जिम्मेदारी खलिस्तानी गतिविधियों और आतंकी प्रशिक्षण शिविरों पर नजर रखने की थी.
करीब 600 ईमेल के जरिए जानकारी लीक की
1998 में भारत के परमाणु परीक्षण ने अमेरिका को चौंका दिया. इसके बाद अमेरिका खुफिया एजेंसी सीआईए ने भारत के खुफिया तंत्र में सेंध लगाने की कोशिश तेज कर दी. एक रिपोर्ट के मुताबिक 1990 के दशक में जब रविंद्र सिंह नीदरलैंड में भारतीय दूतावास में तैनात था तब सीआईए ने उससे संपर्क किया और उसे अपने लिए काम करने के लिए भर्ती किया. ऐसा बताया जाता है कि रविंद्र ने अपने सीआईए हैंडलर को करीब 600 ईमेल के जरिए संवेदनशील जानकारी लीक की. उसके परिवार में किसी की बीमारी के कारण हुई भारी खर्च ने उसे इस रास्ते पर धकेल दिया.
अमेरिका पर रॉ एजेंट की मदद का आरोप
जिसके बाद रविंद्र के व्यवहार में बदलाव देखकर रॉ की काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट ने उस पर नजर रखनी शुरू की. उसके दफ्तर में हिडन कैमरे, फोटोकॉपी मशीन में बग और उसकी कार में माइक लगाए गए. जांच में पता चला कि वो अनावश्यक दस्तावेजों की कॉपी ले रहा था और संवेदनशील जानकारी लीक कर रहा था. रॉ ने उसे हाथ पकड़ने की योजना बनाई. लेकिन 2004 में रविंद्र को शक हो गया. एक रात तलाशी के आदेश के बाद वो अपनी पत्नी के साथ नेपाल के रास्ते अमेरिका भाग गया. कहा जाता है कि सीआईए ने उसकी मदद की थी. रविंद्र सिंह के भागने से भारत की खुफिया जानकारी को भारी नुकसान पहुंचा था. अमेरिका ने उसके सीआईए से जुड़े होने की बात से साफ इंकार कर दिया। कई लोग मानते हैं कि रविंद्र ने पैसे के लिए देशद्रोह किया. जबकि कुछ का कहना है कि कुछ आंतरिक खामियों के चलते उसने इस रास्ते पर चलना मंजूर किया.,