भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाया है। 23 अगस्त 2025 को ओडिशा तट से दोपहर करीब 12:30 बजे Integrated Air Defence Weapon System (IADWS) का पहला सफल परीक्षण किया गया। इस परीक्षण को प्रधानमंत्री द्वारा ‘सुदर्शन चक्र’ नाम दिया गया है। यह एक बहु-स्तरीय स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली है, जो आने वाले वर्षों में भारत की सुरक्षा को और मजबूत बनाएगी। 2026 तक इसके पूरी तरह सक्रिय होने का लक्ष्य रखा गया है। यह प्रणाली बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल, ड्रोन और हाइपरसोनिक हथियारों से निपटने में सक्षम है।
क्या है ‘सुदर्शन चक्र’?
‘सुदर्शन चक्र’ का नाम भगवान विष्णु के पौराणिक शस्त्र से लिया गया है, जो शत्रुओं के विनाश का प्रतीक माना जाता है। यह एक हाईटेक एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे DRDO और ISRO ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इसमें उन्नत निगरानी तकनीक, साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित नियंत्रण शामिल हैं। इसका मकसद दुश्मन के हवाई हमलों को रोकना और देश के नागरिकों व रणनीतिक ठिकानों को सुरक्षा देना है।
IADWS की खासियतें
इस सिस्टम में कई अत्याधुनिक हथियार और तकनीक शामिल हैं –
QRSAM (Quick Reaction Surface to Air Missile): बेहद तेज प्रतिक्रिया देने वाली मिसाइल, जो लक्ष्य पर लॉक कर उसे नष्ट कर देती है।
VSHORADS (Very Short Range Air Defence System): कम दूरी पर आने वाले ड्रोन या मिसाइल जैसे खतरों को तुरंत नष्ट करने वाली प्रणाली।
High Power Laser DEW: डायरेक्टेड एनर्जी वेपन, जो लेजर से हवाई खतरों को बेअसर करता है।
‘सुदर्शन चक्र’ की विशेषताएं
रेंज: 2500 किलोमीटर तक दुश्मन की मिसाइलों को नष्ट करने की क्षमता।
ऊंचाई: 150 किलोमीटर तक हवा में इंटरसेप्ट कर सकता है।
गति: 5 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार।
तकनीक: AI और लेजर-गाइडेड सिस्टम।
संरचना: ग्राउंड-बेस्ड और स्पेस-बेस्ड हाइब्रिड नेटवर्क, जिसमें रडार और सैटेलाइट का संयोजन है।
लक्ष्य: बैलिस्टिक, क्रूज और हाइपरसोनिक हथियारों का विनाश।
लागत: अनुमानित 50,000 करोड़ रुपये।
QRSAM की खासियत
QRSAM मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। इसमें रेडियो फ्रिक्वेंसी सीकर लगा है, जो टारगेट को खोजकर मारने की क्षमता रखता है।
यह मिसाइल 3 से 30 किलोमीटर तक वार कर सकती है।
98 फीट से लेकर 33 हजार फीट की ऊंचाई तक लक्ष्य साध सकती है।
इसकी रफ्तार मैक 4.7 यानी 5757.70 किमी/घंटा है।
इसमें 32 किलोग्राम तक का वॉरहेड लगाया जा सकता है।
इसे मोबाइल लॉन्चर से दागा जाता है।
भविष्य की दिशा
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर इस सिस्टम का नाम ‘सुदर्शन चक्र’ रखते हुए कहा था कि 2035 तक इसे और आधुनिक बनाया जाएगा। यह रक्षा कवच न केवल दुश्मनों को रोकने में सक्षम होगा बल्कि भारत की अंतरिक्ष और साइबर सुरक्षा को भी मजबूत करेगा। यह प्रणाली रणनीतिक रूप से भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत स्थिति में लाने में मदद करेगी