45 साल से कम उम्र के लोगों की अचानक मौत : पिछले कुछ वर्षों में भारत में 45 साल से कम उम्र के लोगों की अचानक मौत के मामले तेजी से बढ़े हैं. कभी जिम में वर्कआउट करते हुए, कभी क्रिकेट खेलते समय तो कभी नींद में ही युवा अपनी जान गंवा रहे हैं। यह ट्रेंड समाज और मेडिकल साइंस दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है. इसी गंभीर मुद्दे पर देश के प्रमुख मेडिकल संस्थान AIIMS से जुड़ी स्टडी और विशेषज्ञों की राय सामने आई है, जिसने कई चौंकाने वाले पहलुओं की ओर इशारा किया है। यह साफ हो गया है कि अचानक होने वाली मौतें केवल “हार्ट अटैक” तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे कई छुपे हुए कारण काम कर रहे हैं.
दिल से जुड़ी बीमारियां: सबसे बड़ा लेकिन अकेला कारण नहीं
AIIMS से जुड़े डॉक्टरों और शोधकर्ताओं के अनुसार, अचानक मौत के मामलों में दिल से जुड़ी समस्याएं एक बड़ा कारण जरूर हैं, लेकिन यह अकेला कारण नहीं है। कई युवाओं में साइलेंट हार्ट डिजीज, जन्मजात हृदय दोष, और हार्ट की इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जुड़ी गड़बड़ियां पाई गई हैं, जिनके लक्षण पहले नजर नहीं आते। कई मामलों में दिल की धमनियों में धीरे-धीरे ब्लॉकेज बनता रहता है, लेकिन व्यक्ति को कोई दर्द या चेतावनी संकेत नहीं मिलता। ऐसे में जब शरीर पर अचानक ज्यादा दबाव पड़ता है, तो जानलेवा स्थिति बन जाती है.
लाइफस्टाइल और मानसिक तनाव की बड़ी भूमिका
स्टडी और मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी भी अचानक मौत के मामलों को बढ़ा रही है. लंबे समय तक बैठकर काम करना, नींद की कमी, जंक फूड, स्मोकिंग, शराब और एक्सरसाइज में अचानक ओवर-एक्सर्शन युवाओं के शरीर पर गहरा असर डाल रहे हैं. इसके अलावा, मानसिक तनाव, डिप्रेशन और एंग्जायटी भी हार्ट और नर्वस सिस्टम को कमजोर करते हैं। कई युवा बाहर से पूरी तरह फिट दिखते हैं, लेकिन अंदरूनी तौर पर उनका शरीर लगातार तनाव झेल रहा होता है.
कोविड के बाद बदली शरीर की प्रतिक्रिया
AIIMS से जुड़े कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि कोविड संक्रमण के बाद शरीर की प्रतिक्रिया पहले जैसी नहीं रही है। कोविड के बाद कई लोगों में ब्लड क्लॉटिंग, हार्ट मसल की सूजन और इम्यून सिस्टम में बदलाव देखे गए हैं। हालांकि हर अचानक मौत को सीधे कोविड या वैक्सीन से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है, लेकिन यह जरूर माना जा रहा है कि कोविड के बाद शरीर पर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी हो गई है। खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से किसी बीमारी से ग्रसित थे या जिन्होंने लंबे समय तक संक्रमण झेला।
बचाव ही सबसे बड़ा इलाज: क्या करें युवा?
विशेषज्ञों के अनुसार, अचानक मौत के खतरे को कम करने के लिए समय रहते सावधानी बेहद जरूरी है. नियमित हेल्थ चेक-अप, ईसीजी, ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एक्सरसाइज जरूर करें, लेकिन धीरे-धीरे और डॉक्टर की सलाह के साथ. नींद पूरी लें, तनाव को मैनेज करें और किसी भी असामान्य लक्षण जैसे सीने में जकड़न, चक्कर, अत्यधिक थकान या सांस फूलने को हल्के में न लें. AIIMS से जुड़े डॉक्टरों का साफ संदेश है, युवावस्था अमरता की गारंटी नहीं है, सही समय पर जागरूकता ही जीवन बचा सकती है.