Sugar Price Hike : देशभर में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार लगातार कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन बाजार में अभी तक इसका असर दिखाई नहीं दे रहा। रविवार 30 अगस्त को कई जगहों पर चीनी की खुदरा कीमत 74 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। वहीं राष्ट्रीय औसत खुदरा कीमत भी लगातार ऊपर बनी हुई है।
60 रुपये से ऊपर बना हुआ बाजार
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 64.24 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। यह एक सप्ताह पहले के 63.12 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में अधिक है। देश के अधिकांश शहरों में चीनी 60 रुपये प्रति किलो से ऊपर बिक रही है, जिससे घरेलू बजट पर दबाव बढ़ रहा है।
एक साल में 38 फीसदी से ज्यादा बढ़े दाम
चीनी की मौजूदा कीमतें पिछले साल की तुलना में 38.63 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। वहीं एक महीने पहले के मुकाबले भी कीमतों में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रविवार को दिल्ली में चीनी 62 रुपये, मुंबई में 66 रुपये, चेन्नई में 63 रुपये और रांची में 68 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकती नजर आई। अधिकतम खुदरा कीमत 74 रुपये और न्यूनतम 40 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई।
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थोक बाजार में भी बनी तेजी
खुदरा बाजार के साथ-साथ थोक बाजार में भी चीनी के दाम ऊंचे बने हुए हैं। रविवार को थोक कीमत 59.73 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जो एक सप्ताह पहले 58.66 रुपये थी। थोक स्तर पर भी पिछले साल की तुलना में करीब 38 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि निकट भविष्य में कीमतों में बड़ी राहत मिलना आसान नहीं होगा।
सरकार ने उठाए कई कदम
कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा चीनी के निर्यात पर रोक लगाई गई है और थोक उपभोक्ताओं व कारोबारियों के लिए भंडारण सीमा से जुड़े नियम भी सख्त किए गए हैं। सरकार को उम्मीद थी कि इन कदमों से बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा।
फिर भी क्यों नहीं घट रहे दाम?
उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मिल स्तर पर चीनी की कीमतों में कुछ नरमी आई है, लेकिन उसका पूरा फायदा अभी खुदरा ग्राहकों तक नहीं पहुंचा है। मिल, थोक और खुदरा कीमतों के बीच का अंतर अभी भी बना हुआ है। यही वजह है कि सरकार की कोशिशों के बावजूद बाजार में चीनी के दाम ऊंचे बने हुए हैं और आम उपभोक्ताओं को राहत का इंतजार करना पड़ रहा है।