भारत में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच पड़ोसी देश नेपाल में इसके दाम और ज्यादा बढ़ गए हैं। नेपाल के कई बाजारों में चीनी 140 से 150 नेपाली रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। वहीं, उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में चीनी करीब 100 से 105 नेपाली रुपये प्रति किलो के आसपास मिल रही है। कीमतों में इस बड़े अंतर के चलते नेपाल के लोग सीमा पार कर उत्तर प्रदेश के बाजारों में खरीदारी करने पहुंच रहे हैं।
30 से 40 नेपाली रुपये तक हो रही बचत
लखीमपुर खीरी के गौरीफंटा बॉर्डर से सटे बनगवा बाजार में नेपाली ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। स्थानीय दुकानदारों के मुताबिक, भारत में चीनी महंगी होने के बावजूद नेपाल की तुलना में यहां इसकी कीमत काफी कम है। नेपाल में जहां चीनी 140 से 150 नेपाली रुपये किलो तक बिक रही है, वहीं बनगवा बाजार में यह करीब 100 से 105 नेपाली रुपये में मिल रही है। इस तरह एक किलो चीनी पर ग्राहकों को करीब 30 से 40 नेपाली रुपये तक की बचत हो रही है।
रोजमर्रा का सामान खरीदने पहुंच रहे नेपाली
नेपाल से खरीदारी करने आई महिलाओं का कहना है कि वहां चीनी काफी महंगी हो गई है। भारत के सीमावर्ती बाजार में कम कीमत पर चीनी मिलने के कारण वे यहां से खरीदकर ले जाती हैं। उनका कहना है कि महंगाई के दौर में रोजमर्रा के सामान पर होने वाली छोटी बचत भी परिवार के बजट के लिए महत्वपूर्ण है। चीनी की कीमत में बड़ा अंतर होने के कारण सीमा पार जाकर खरीदारी करना उनके लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।
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कारोबारियों ने भी बताई बढ़ती बिक्री
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार नेपाल में चीनी के दाम बढ़ने के बाद बनगवा बाजार में इसकी मांग बढ़ी है। कारोबारियों का कहना है कि फिलहाल बाजार में चीनी की कोई कमी नहीं है, लेकिन नेपाली ग्राहकों की संख्या पहले के मुकाबले ज्यादा दिखाई दे रही है। दुकानदारों के मुताबिक, कीमतों में अंतर ही इसकी सबसे बड़ी वजह है। सीमावर्ती बाजार होने के कारण नेपाल से आने वाले लोग चीनी के साथ रोजमर्रा की अन्य जरूरतों का सामान भी खरीदते हैं।
कीमतों के अंतर का मिल रहा सीधा फायदा
बनगवा बाजार के स्थानीय कारोबारी धर्मेंद्र राजपूत के मुताबिक, भारत में चीनी के दाम बढ़ने के बावजूद नेपाल की तुलना में यहां कीमत कम है। इसी वजह से नेपाली ग्राहक सीमा पार करके खरीदारी कर रहे हैं। फिलहाल प्रति किलो 30 से 40 नेपाली रुपये तक की बचत लोगों को आकर्षित कर रही है। अगर दोनों देशों के बाजारों में कीमतों का यह अंतर बना रहता है तो सीमावर्ती भारतीय बाजारों में नेपाली ग्राहकों की आवाजाही आगे भी बढ़ सकती है।