Sugar vs Ethanol : देश में चीनी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और कई जगह खुदरा बाजार में चीनी 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसी बीच गन्ने से एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी चर्चा तेज है। कई लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर 1 क्विंटल गन्ने से ज्यादा क्या बनता है, चीनी या एथेनॉल? इसका जवाब गन्ने के उपयोग के तरीके पर निर्भर करता है। यदि गन्ने का रस सीधे एथेनॉल बनाने में लगाया जाए तो परिणाम अलग होंगे और यदि पहले चीनी बनाई जाए तो तस्वीर बदल जाती है।
1 क्विंटल गन्ने से कितनी चीनी बनती है?
सामान्य तौर पर 100 किलो यानी 1 क्विंटल गन्ने से 9 से 12 किलो तक चीनी तैयार होती है। यह मात्रा मिल की रिकवरी दर पर निर्भर करती है। अगर रिकवरी 10 प्रतिशत है तो 100 किलो गन्ने से लगभग 10 किलो चीनी मिलेगी। पेराई सीजन की शुरुआत में रिकवरी कम रहती है, जबकि दिसंबर और जनवरी में गन्ने की मिठास बढ़ने के साथ चीनी उत्पादन भी बढ़ जाता है। चीनी के साथ-साथ खोई और शीरा भी उप-उत्पाद के रूप में निकलते हैं।
सीधे गन्ने के रस से कितना एथेनॉल बनता है?
अगर गन्ने के रस का उपयोग सीधे एथेनॉल उत्पादन में किया जाए तो 1 क्विंटल गन्ने से लगभग 7 से 8.4 लीटर एथेनॉल तैयार हो सकता है। यही वजह है कि एथेनॉल उत्पादन को लेकर चीनी उद्योग में लगातार चर्चा होती रहती है। सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है, इसलिए कई मिलें एथेनॉल उत्पादन को भी प्राथमिकता दे रही हैं।
ये भी पढ़ें : होटल में आधार की फोटोकॉपी का झंझट खत्म! पहचान सत्यापन के नए नियमों से बदलेगा चेक-इन का तरीका
शीरे से एथेनॉल बनाने पर कितना उत्पादन?
अगर पहले चीनी बनाई जाती है और बाद में बचे हुए शीरे से एथेनॉल निकाला जाता है, तो उत्पादन कम हो जाता है। बी-हेवी शीरे से 1 क्विंटल गन्ने पर करीब 2.2 से 2.5 लीटर एथेनॉल मिलता है। वहीं सी-हेवी शीरे से यह मात्रा केवल 1 से 1.1 लीटर तक रहती है। यानी एथेनॉल उत्पादन की मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि कच्चा माल कौन-सा इस्तेमाल किया जा रहा है।
चीनी और एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया
चीनी बनाने के लिए पहले गन्ने की पेराई की जाती है, फिर रस की सफाई, वाष्पीकरण, क्रिस्टलीकरण और सुखाने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। दूसरी ओर एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के रस को खमीर के जरिए फर्मेंट किया जाता है। इसके बाद आसवन और निर्जलीकरण की प्रक्रिया से फ्यूल ग्रेड एथेनॉल तैयार किया जाता है। दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग तकनीक और संयंत्रों पर आधारित होती हैं।
आखिर ज्यादा क्या बनता है?
अगर केवल मात्रा की बात करें तो 1 क्विंटल गन्ने से करीब 10 किलो चीनी या सीधे रस से 7 से 8.4 लीटर एथेनॉल बनाया जा सकता है। हालांकि दोनों की इकाइयां अलग हैं, इसलिए सीधी तुलना संभव नहीं है। लेकिन इतना साफ है कि यदि गन्ने का रस एथेनॉल उत्पादन में लगाया जाए तो चीनी का उत्पादन कम होगा। वहीं चीनी उत्पादन को प्राथमिकता देने पर बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और एथेनॉल की मात्रा घटेगी। यही वजह है कि वर्तमान समय में चीनी और एथेनॉल के बीच संतुलन बनाना सरकार और चीनी उद्योग दोनों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।