मध्यप्रदेश के विदिशा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सभी को हैरान और परेशान कर दिया है। मामूली पारिवारिक कहासुनी कब एक दर्दनाक हादसे में बदल जाएगी, इसका अंदाज़ा किसी को नहीं था। गोदीपुर गांव में रहने वाले 20 वर्षीय युवक करण अहिरवार ने सिर्फ इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि उसकी मां ने व्रत की वजह से उसके लिए मुर्गा बनाने से मना कर दिया था। इस छोटी-सी बात से आहत होकर करण ने अपने कमरे में फांसी लगा ली। परिवारवालों ने उसे फंदे से उतारकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी। यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए त्रासदी है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है कि मानसिक स्वास्थ्य, संवाद और समझदारी कितनी जरूरी है।
मां के मना करने पर कर लिया खुद को खत्म
शनिवार की रात करण मुर्गा लेकर घर पहुंचा और अपनी मां से उसे पकाने की जिद की। लेकिन मां ने शनिवार व्रत का हवाला देते हुए अगले दिन पकाने की बात कही। इस पर करण गुस्से में अपने कमरे में चला गया और फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
समय रहते उसके भाईयों को शक हुआ, तो उन्होंने दरवाजा तोड़कर उसे फंदे से उतारा और तुरंत ग्यारसपुर अस्पताल लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर करण को जिला अस्पताल और फिर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन रविवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस कर रही मामले की जांच
रविवार को युवक का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर केस डायरी हैदरगढ़ थाने भेजने की बात कही है। अब आगे की जांच हैदरगढ़ पुलिस द्वारा की जाएगी।
क्या कहती हैं ये घटनाएं?
यह कोई पहली घटना नहीं है, जब मामूली वजह से किसी युवक ने आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठाया हो। हाल ही में पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले में भी ऐसा ही मामला सामने आया, जहां चोरी के झूठे आरोप से आहत होकर एक 12 वर्षीय बच्चे ने कीटनाशक पी लिया।
मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी बन रही खतरा
इन घटनाओं से साफ है कि युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज और परिवारों को और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। छोटे-छोटे झगड़े और असहमति भी कभी-कभी जीवन को खत्म करने का कारण बन जाते हैं, इसलिए संवाद और समझ जरूरी है।