Sukhvinder Singh Dhillon: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 1993 के आर्म्स एक्ट से जुड़े एक मामले में आरोपी सुखविंदर सिंह ढिल्लो को जमानत दे दी है। ढिल्लो को इसी वर्ष फरवरी में उत्तर प्रदेश एटीएस और नोएडा पुलिस ने पंजाब से गिरफ्तार किया था। वह लंबे समय से इस मामले में वांछित था और वर्ष 1995 में अदालत ने उसे फरार घोषित कर दिया था। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और तथ्यों पर विचार करने के बाद जमानत देने का आदेश दिया।
1993 में दर्ज हुआ था मामला
पुलिस के अनुसार, वर्ष 1993 में नोएडा में आर्म्स एक्ट के तहत सुखविंदर सिंह ढिल्लो के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। उस समय पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर उसके कब्जे से एक एके-56 राइफल और बड़ी संख्या में कारतूस बरामद करने का दावा किया था। बाद में उसे स्थानीय अदालत से जमानत मिल गई थी, लेकिन इसके बाद वह अदालत में पेश नहीं हुआ।
1995 में घोषित हुआ था फरार
अदालत में लगातार अनुपस्थित रहने के कारण वर्ष 1995 में उसे फरार घोषित कर दिया गया और उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया। करीब 31 वर्ष बाद फरवरी 2026 में उत्तर प्रदेश एटीएस और नोएडा पुलिस ने उसे पंजाब से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया गया।
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हाईकोर्ट ने क्या कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत नहीं होता कि आरोपी ने पहले मिली जमानत का दुरुपयोग किया था या जानबूझकर न्यायिक प्रक्रिया से बचने का प्रयास किया था। इसी आधार पर अदालत ने उसे जमानत देने का आदेश पारित किया।
अन्य मामलों का भी है उल्लेख
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सुखविंदर सिंह ढिल्लो के खिलाफ पंजाब में हत्या, हत्या के प्रयास और अन्य मामलों से संबंधित कई पुराने मुकदमे भी दर्ज हैं। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह आदेश केवल वर्ष 1993 के आर्म्स एक्ट मामले से संबंधित है। अन्य मामलों में कानूनी प्रक्रिया अलग से जारी रहेगी।