छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षा बलों को नक्सल मोर्चे पर एक और बड़ी सफलता मिली है। दरभा डिवीजन में सक्रिय 10 कुख्यात माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। इन पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने AK-47, SLR और बीजीएल जैसे घातक हथियार भी जमा किए। पुनर्वास नीति ‘पूना मारगेम’ का लाभ लेते हुए सभी ने हिंसा छोड़ नई जिंदगी शुरू करने की इच्छा जताई है।
33 लाख के इनामी दस माओवादी आत्मसमर्पण कर लौटे मुख्यधारा में
सुकमा जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान को बड़ी मजबूती मिली है। दरभा डिवीजन में लंबे समय से सक्रिय 10 माओवादी कार्यकर्ताओं ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें 8 लाख का इनामी मीडियम भामा/भीमा भी शामिल है, जो सुरक्षा बलों की सूची में प्रमुख वांछित माओवादी था। अधिकारियों ने उनके इस कदम को क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में बड़ा मोड़ बताया है।
हथियार डालकर अपनाया ‘पूना मारगेम’ का रास्ता
सरेंडर करने वाले माओवादियों ने 1 AK-47, 2 SLR और 1 BGL समेत कई हथियार जमा किए। सभी नक्सलियों ने राज्य की पुनर्वास नीति ‘पूना मारगेम’ का लाभ लेने का निर्णय लिया है। गोंडी भाषा से लिया गया यह शब्द पुनर्वास के माध्यम से पुनर्जीवन का प्रतीक माना जाता है। इस पहल के तहत सरकार आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और जीवनयापन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराती है।
सुरक्षाबलों की रणनीति से लगातार कमजोर हो रहा नक्सल नेटवर्क
बस्तर क्षेत्र में सुरक्षाबलों की लगातार बढ़ती चौकसी और तगड़ी इंटेलिजेंस नेटवर्किंग ने नक्सलियों की गतिविधियों को काफी सीमित कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार बस्तर डिवीजन, साउथ बस्तर और दरभा क्षेत्र में अब सिर्फ कुछ ही नक्सली सक्रिय बचे हैं, जबकि PLGA की कुछ टुकड़ियां अभी भी सक्रियता बनाए हुए हैं। बावजूद इसके, लगातार बड़े आत्मसमर्पण नक्सल तंत्र के कमजोर होने का संकेत देते हैं।
अधिकारी बोले—अब नक्सलियों के पास हिंसा छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं
आत्मसमर्पण कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्र में विकास, सुरक्षा की उपस्थिति और सरकार की पुनर्वास नीतियों ने नक्सलियों को मुख्यधारा की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया है। अधिकारियों ने सक्रिय नक्सली नेताओं से भी हिंसा छोड़कर समाज में लौटने की अपील की है, ताकि बस्तर में स्थायी शांति स्थापित की जा सके।
तीन महीनों में छत्तीसगढ़ में बड़े आत्मसमर्पणों की लंबी सूची
पिछले तीन महीनों में दंतेवाड़ा, बीजापुर, कांकेर और बस्तर जिलों में सैकड़ों नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। बड़ी संख्या में इनामी माओवादियों द्वारा हथियार डालना यह दर्शाता है कि सुरक्षा बलों की रणनीति और सरकारी नीतियां प्रभावी साबित हो रही हैं। सुकमा में हुआ यह नया आत्मसमर्पण नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार माना जा रहा है।