कुदरत के कैलेंडर में 21 जून एक खास दिन माना जाता है। इस दिन उत्तरी गोलार्ध में साल का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है। ग्वालियर में सूरज करीब 13 घंटे 43 मिनट तक आसमान में रहेगा। खगोल विज्ञान में इसे 'समर सॉल्सटिस' या 'ग्रीष्म अयनांश' कहा जाता है। इस खगोलीय घटना के बाद दिन धीरे-धीरे छोटे और रातें लंबी होने लगेंगी। भारतीय ज्योतिष और परंपराओं में भी इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है।
क्यों खास है 21 जून?
21 जून को पृथ्वी की स्थिति ऐसी होती है कि उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर सबसे ज्यादा झुका रहता है। इसी कारण सूर्य की किरणें अधिक समय तक इस हिस्से पर पड़ती हैं और दिन की अवधि बढ़ जाती है। यही वजह है कि इस तारीख को साल का सबसे लंबा दिन माना जाता है।
23.5 डिग्री का झुकाव बनता है वजह
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी अपनी धुरी पर करीब 23.5 डिग्री झुकी हुई है। जून के महीने में यह झुकाव उत्तरी गोलार्ध को सूर्य के सबसे करीब ले आता है। परिणामस्वरूप भारत समेत कई देशों में दिन का समय बढ़ जाता है, जबकि रात की अवधि कम हो जाती है।
उत्तरायण का समापन, दक्षिणायन की शुरुआत
भारतीय ज्योतिष में 21 जून को विशेष परिवर्तन का दिन माना जाता है। इस दिन के बाद सूर्य की गति दक्षिणायन की ओर मानी जाती है। इसके साथ ही दिन छोटे होने और रातें लंबी होने का क्रम शुरू हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं में दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि का आरंभ भी कहा गया है।
वर्षा ऋतु के आगमन का संकेत
परंपरागत मान्यताओं के अनुसार दक्षिणायन के शुरू होते ही वर्षा ऋतु का विधिवत प्रवेश माना जाता है। भीषण गर्मी के बाद मौसम में बदलाव का यह चरण लोगों के लिए राहत का संदेश लेकर आता है और प्रकृति भी धीरे-धीरे नए रंग में दिखाई देने लगती है।
अलग-अलग शहरों में दिन की अवधि
21 जून को देश के विभिन्न शहरों में दिन की लंबाई अलग-अलग रहेगी। ग्वालियर में दिन 13 घंटे 43 मिनट का होगा, जबकि दिल्ली में यह अवधि 13 घंटे 55 मिनट और उज्जैन में लगभग 13 घंटे 30 मिनट रहेगी। इसके बाद हर दिन कुछ सेकंड के हिसाब से दिन छोटे होते जाएंगे।