इस साल की गर्मी अभी सिर्फ शुरुआत मानी जा रही है, जबकि आने वाले महीनों में हालात और भयावह हो सकते हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर में तेजी से बन रहा ‘सुपर एल नीन्यो’ दुनिया के मौसम का संतुलन बिगाड़ सकता है। इसका सीधा असर भारत पर भी देखने को मिल सकता है, जहां भीषण लू, कमजोर मानसून और पानी के संकट जैसी स्थितियां पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।
क्या है एल नीन्यो और क्यों बढ़ा रहा खतरा
एल नीन्यो एक मौसमी प्रक्रिया है, जो प्रशांत महासागर के तापमान और हवाओं में बदलाव के कारण पैदा होती है। सामान्य स्थिति में समुद्री हवाएं पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हैं, लेकिन एल नीन्यो के दौरान यह व्यवस्था कमजोर पड़ जाती है। इससे समुद्र का पानी तेजी से गर्म होने लगता है और मौसम का संतुलन बिगड़ जाता है। यही बदलाव एशिया के कई देशों, खासकर भारत में गर्मी और कम बारिश की वजह बनता है।
सुपर एल नीन्यो क्यों माना जा रहा खतरनाक
वैज्ञानिकों के मुताबिक इस बार प्रशांत महासागर की सतह के नीचे गर्म पानी का बड़ा भंडार जमा हो चुका है। यदि समुद्र का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ता है तो इसे ‘सुपर एल नीन्यो’ कहा जाएगा। पिछले कई दशकों में ऐसी स्थिति बेहद कम बार बनी है, लेकिन हर बार इसने दुनिया भर में सूखा, बाढ़ और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पैदा की है। इस बार तापमान तेजी से बढ़ने के कारण खतरा और ज्यादा गंभीर माना जा रहा है।
भारत में पड़ सकता है सबसे ज्यादा असर
सुपर एल नीन्यो बनने की स्थिति में भारत के कई हिस्सों में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में लंबी और खतरनाक हीटवेव चलने की आशंका है। इसके साथ ही मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे खेती और जलस्रोतों पर बड़ा असर पड़ेगा। कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बनने का डर भी बढ़ गया है।
ग्लोबल वार्मिंग ने बढ़ाई चिंता
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया है। दुनिया के समुद्र पहले से ही सामान्य तापमान से ज्यादा गर्म हैं। ऐसे में सुपर एल नीन्यो अतिरिक्त गर्मी पैदा करेगा, जिससे पृथ्वी पर तापमान के नए रिकॉर्ड बन सकते हैं। मौसम में यह बदलाव केवल गर्मी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिजली संकट, पानी की कमी और फसलों के नुकसान जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
पहले भी दिख चुका है इसका असर
साल 1982, 1997 और 2015 में आए सुपर एल नीन्यो ने दुनिया के कई देशों में मौसम संबंधी तबाही मचाई थी। कहीं सूखा पड़ा तो कहीं बाढ़ और जंगलों में आग लगी। भारत में भी कमजोर मानसून और पानी की कमी जैसी समस्याएं सामने आई थीं। इस बार वैज्ञानिकों को डर है कि समुद्र की तेजी से बढ़ती गर्मी पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है और आने वाले महीनों में हालात ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।