मॉनसून 2026 : प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी के कारण एल नीनो (El Niño) स्थिति मजबूत होती जा रही है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह स्थिति आने वाले महीनों में और तीव्र हो सकती है, जिसे कुछ रिपोर्टों में “सुपर अल नीनो” भी कहा जा रहा है। इसका सीधा असर भारत के मानसून पैटर्न पर पड़ता है। सामान्यतः एल नीनो के दौरान भारत में बारिश कमजोर हो जाती है और कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बनने का खतरा बढ़ जाता है. इस बार मौसम विभाग (IMD) ने भी संकेत दिए हैं कि यह एल नीनो मानसून सीजन के दौरान और मजबूत हो सकता है, जिससे बारिश का वितरण असमान और कुल वर्षा सामान्य से कम रह सकती है.
मानसून पर संभावित असर
विशेषज्ञों का मानना है कि एल नीनो की स्थिति बनने पर दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ सकता है। इससे खासकर बारिश पर निर्भर खेती प्रभावित होती है। धान, दालें और तिलहन जैसी फसलों की बुवाई और उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है. कई हालिया रिपोर्टों में अनुमान लगाया गया है कि यदि यह स्थिति मजबूत होती है तो वर्षा सामान्य से नीचे रह सकती है, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा. हालांकि यह भी कहा गया है कि हर एल नीनो समान प्रभाव नहीं डालता और कुछ परिस्थितियों में इसका असर आंशिक भी हो सकता है.
197 जिलों में बड़ा खतरा
केंद्रीय कृषि मंत्रालय और मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार देशभर में 197 जिलों को एल नीनो के प्रभाव के लिए संवेदनशील माना गया है। इन जिलों के लिए राज्यवार contingency plan तैयार किया गया है ताकि बारिश कम होने की स्थिति में किसानों को समय पर मदद मिल सके. सरकार ने इन क्षेत्रों में बीज, खाद और अन्य कृषि संसाधनों का भंडारण शुरू कर दिया है और किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है.
कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मानसून कमजोर रहता है तो इसका सबसे बड़ा असर खरीफ फसलों पर पड़ेगा। इससे उत्पादन घट सकता है और खाद्य महंगाई बढ़ने का खतरा भी रहता है. सूखे या कम बारिश की स्थिति में जलाशयों का स्तर गिर सकता है, जिससे सिंचाई और पेयजल आपूर्ति पर भी असर पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में आय और रोजगार पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है.
कुल मिलाकर, प्रशांत महासागर में बढ़ते एल नीनो प्रभाव ने भारत के मानसून को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और सरकार ने पहले से ही 197 संवेदनशील जिलों में तैयारी शुरू कर दी है. हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि मानसून पूरी तरह एल नीनो पर निर्भर नहीं होता, बल्कि अन्य समुद्री और वायुमंडलीय कारक भी बारिश को प्रभावित करते हैं। इसलिए अंतिम स्थिति आने वाले हफ्तों में मौसम के विकास पर निर्भर करेगी.