Supreme Court Arrest Rules : सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में गिरफ्तारी से जुड़े संवैधानिक अधिकारों को लेकर एक अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि अगर किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी संविधान के अनुच्छेद 22 में दिए गए नियमों का पालन न करने के कारण गलत ठहराई जाती है और उसे रिहा किया जाता है, तो पुलिस उसे अपनी मर्जी से तुरंत दोबारा गिरफ्तार नहीं कर सकती। दोबारा हिरासत में लेने के लिए न्यायिक मंजूरी की जरूरत होगी। यह फैसला 21 सितंबर 2026 को आया।
गिरफ्तारी की वजह लिखित में बतानी होगी
अनुच्छेद 22 के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को यह जानने का अधिकार है कि उसे किस वजह से गिरफ्तार किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कहा है कि गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में दिए जाने चाहिए। अदालत ने माना कि यह केवल कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ी सुरक्षा है। इससे व्यक्ति को अपने वकील से सलाह लेने और गिरफ्तारी या हिरासत को चुनौती देने का मौका मिलता है।
गलती से हुई गिरफ्तारी के बाद क्या होगा
अगर पुलिस ने गिरफ्तारी के समय जरूरी संवैधानिक नियमों का पालन नहीं किया और अदालत ने गिरफ्तारी को गलत माना, तो व्यक्ति को रिहा करना होगा। ऐसी रिहाई को सामान्य जमानत नहीं माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार यह उस हिरासत से रिहाई है, जो कानून और संविधान के मुताबिक सही नहीं थी।
दोबारा गिरफ्तारी के लिए मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी
अगर जांच एजेंसी को लगता है कि व्यक्ति की हिरासत अभी भी जरूरी है, तो उसे पहले गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में देने होंगे। इसके बाद संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन देना होगा। आवेदन में यह बताना होगा कि दोबारा हिरासत की जरूरत क्यों है और पहली बार गिरफ्तारी के दौरान नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ। इस आवेदन पर जांच अधिकारी के वरिष्ठ अधिकारी की मंजूरी भी जरूरी होगी।
जांच अधिकारी पर भी होगी कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने केवल दोबारा गिरफ्तारी की प्रक्रिया ही तय नहीं की है। अगर गिरफ्तारी में संवैधानिक नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो जांच को दूसरे अधिकारी को सौंपने और विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश भी दिया गया है। यानी जिस अधिकारी पर नियम तोड़ने का सवाल उठा है, उसी अधिकारी के हाथ में आगे की पूरी जांच नहीं रहेगी।
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गंभीर आरोप होने पर भी नियम नहीं बदलेंगे
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी मामले में आरोप कितने भी गंभीर क्यों न हों, गिरफ्तारी के समय संविधान में दिए गए अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। इसके अलावा, गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने का नियम भी अनुच्छेद 22 के तहत महत्वपूर्ण सुरक्षा है। अगर इस नियम का भी उल्लंघन हुआ और व्यक्ति को रिहा किया गया, तो दोबारा हिरासत के लिए तय न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना होगा।