दहेज प्रताड़ना के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए समाज को आईना दिखाया है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर लड़के शादी क्यों करते हैं, अगर उन्हें दुल्हन और उसके परिवार का सम्मान नहीं करना है। यह टिप्पणी एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें शादी के तीन साल के भीतर एक महिला की संदिग्ध मौत ने दहेज प्रथा की भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी ने उठाए गंभीर सवाल
दहेज उत्पीड़न के एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि समाज में दुल्हन और उसके परिवार के साथ हो रहा अपमान अब बंद होना चाहिए। कोर्ट ने साफ तौर पर पूछा कि जब सम्मान नहीं देना है, तो शादी करने का उद्देश्य क्या है। यह टिप्पणी दहेज प्रथा के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखी जा रही है।
दहेज के नाम पर आर्थिक और मानसिक दबाव
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि दहेज के नाम पर लड़की और उसके परिवार पर लगातार आर्थिक दबाव बनाया जाता है। कई मामलों में यह दबाव मानसिक उत्पीड़न का रूप ले लेता है, जिससे पीड़ित महिलाओं की स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है। कोर्ट ने इसे समाज की एक खतरनाक प्रवृत्ति बताया।
‘निचोड़ने’ की मानसिकता पर कोर्ट की नाराजगी
कोर्ट ने टिप्पणी में कहा कि कई मामलों में लड़के पक्ष की कोशिश होती है कि दुल्हन और उसके परिवार को पूरी तरह आर्थिक रूप से ‘निचोड़’ लिया जाए। यह मानसिकता न सिर्फ अमानवीय है बल्कि कानूनन अपराध भी है। कोर्ट ने इस तरह के व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई।
पीड़ित परिवार के साथ अमानवीय व्यवहार
मामले के तथ्यों का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के परिवार को ‘भिखारी’ तक कहा गया, जबकि वे अपनी बेटी को बचाने की कोशिश कर रहे थे। कोर्ट ने इसे बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता की पूरी तरह कमी दिखाई देती है।
देरी की दलील खारिज, निचली अदालत का फैसला बरकरार
कोर्ट ने एफआईआर दर्ज होने में देरी की दलील को खारिज कर दिया और कहा कि ऐसे मामलों में संदेश जाना जरूरी है कि दुल्हनों के साथ हो रहे अत्याचार बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। अंत में कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालतों के फैसले को बरकरार रखा।