सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 21 जुलाई 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कड़ी चेतावनी दी है. अदालत ने कहा कि ईडी का इस्तेमाल राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए नहीं होना चाहिए. साथ ही कोर्ट ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती और राज्य मंत्री बिरथी सुरेश के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस को लेकर ईडी की अपील को खारिज कर दिया.
"राजनीतिक लड़ाई मतदाताओं के बीच लड़ी जाए"
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन की पीठ ने साफ कहा, "इस वायरस को पूरे देश में मत फैलाइए. राजनीतिक लड़ाई मतदाताओं के सामने लड़ी जाए, कोर्ट में नहीं." ईडी की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू कोर्ट में पेश हुए थे. कोर्ट ने उन्हें साफ कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट से कोई ऐसी बात ना कहलवाएं जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो.
"सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक मंच मत बनाइए"
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "कृपया हमें इस मामले में मुंह खोलने के लिए मजबूर न करें. सुबह से ही हम कह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक लड़ाई का मंच न बनाया जाए, वरना हमें ईडी के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करनी पड़ेगी."
इससे पहले भी कोर्ट ने दी थी चेतावनी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक और मामले का जिक्र किया, जिसमें एक एनजीओ ने ममता बनर्जी के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी. वह याचिका शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़ी थी. उस पर भी कोर्ट ने कहा था कि राजनीतिक लड़ाई के लिए अदालत का इस्तेमाल न किया जाए.
क्या था मामला?
मार्च में ईडी ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती और राज्य मंत्री बिरथी सुरेश को समन भेजा था. इन दोनों ने इस समन को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. उनका तर्क था कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का कोई ठोस सबूत नहीं है.
पार्वती ने कहा था कि उन्हें एमयूडीए (मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण) द्वारा जो 14 प्लॉट दिए गए थे, वह उन्होंने वापस कर दिए हैं. ऐसे में उनके पास कोई 'अपराध से अर्जित आय' नहीं है और न ही उन्होंने उसका कोई उपयोग किया.
हाई कोर्ट ने ईडी की जल्दबाज़ी पर सवाल उठाया
कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस मामले में ईडी की ओर से जल्द कार्रवाई शुरू करने पर भी सवाल उठाए थे. कोर्ट ने कहा था कि सिर्फ पार्वती को भूखंड दिए जाने की बात पर ही मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनाना सही नहीं है. ईडी ने अपनी सफाई में कहा था कि जांच सिर्फ पार्वती तक सीमित नहीं है, बल्कि एमयूडीए द्वारा सैकड़ों भूखंडों के गलत आवंटन की भी जांच की जा रही है, जिसमें बिल्डर, एजेंट, अफसर और अन्य प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं.
सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की अपील को खारिज कर दिया. हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि यह आदेश किसी अन्य मामले में मिसाल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.