Supreme Court Grants Relief: असम में विदेशी घोषित की गई दो महिलाओं को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने सालेहा खातून और सरभानु बेगम के निर्वासन पर अंतरिम रोक लगाते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मामले की अगली सुनवाई तक दोनों महिलाओं के खिलाफ किसी तरह की निर्वासन संबंधी कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस फैसले के बाद मामले ने कानूनी और मानवीय दोनों स्तरों पर नई चर्चा छेड़ दी है।
डिटेंशन सेंटर से जुड़ा है मामला
यह मामला असम के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें दोनों महिलाओं को विदेशी नागरिक घोषित किया गया था। इसके बाद उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा गया। महिलाओं ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया और दावा किया कि वे भारतीय नागरिक हैं। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलीलों पर विचार करते हुए अंतरिम राहत प्रदान की।
केंद्र सरकार को जारी हुआ नोटिस
सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। साथ ही याचिकाकर्ताओं की नागरिकता से जुड़े दावों और उपलब्ध रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 16 जुलाई निर्धारित की है।
हाईकोर्ट से नहीं मिली थी राहत
दोनों महिलाओं ने पहले उच्च न्यायालय में भी राहत की मांग की थी, लेकिन वहां उनकी याचिका खारिज हो गई थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनके परिवार के नाम पुराने मतदाता रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों में दर्ज हैं, जो उनकी भारतीय नागरिकता का आधार बनते हैं। इसी आधार पर उन्होंने विदेशी घोषित किए जाने के फैसले को चुनौती दी है।
अगली सुनवाई पर टिकी हैं निगाहें
मामले में अब सभी पक्षों की नजरें 16 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर हैं। यह सुनवाई न केवल दोनों महिलाओं के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगी, बल्कि असम में नागरिकता और फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल से जुड़े मामलों पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकती है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से दोनों महिलाओं को तत्काल राहत मिली है और उनके निर्वासन की प्रक्रिया पर रोक लगी हुई है।