पूर्वी दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के नवीन शाहदरा स्थित एल और जे ब्लॉक में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक लोगों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। पिछले तीन महीनों से लगातार कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे इलाके में भय का माहौल बना हुआ है।
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, बीते एक महीने में ही करीब पांच लोगों को आवारा कुत्ते काट चुके हैं। गली-मोहल्लों में रोजाना 10 से 12 कुत्तों के झुंड घूमते रहते हैं, जो अचानक राहगीरों, बच्चों और बुजुर्गों पर हमला कर देते हैं। सुबह और शाम के समय स्थिति और अधिक खतरनाक हो जाती है।
हालात ऐसे हो गए हैं कि बच्चों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। लोग अपने बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से डर रहे हैं और छोटे बच्चे अब गली में खेलने से भी कतराने लगे हैं। कई बार कुत्ते लोगों के हाथ से खाने-पीने का सामान तक छीन लेते हैं।
निवासियों का कहना है कि इस समस्या को लेकर नगर निगम में कई बार लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। आरोप है कि हर बार केवल आश्वासन दिया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए न तो डॉग शेल्टर बनाए गए हैं और न ही फीडिंग प्वाइंट घोषित किए गए हैं। कुत्तों के बंध्याकरण की प्रक्रिया भी धीमी गति से चल रही है, जिससे समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश बेअसर!
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस स्टैंड और खेल परिसरों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर भी बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते घूमते नजर आते हैं। नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कागजों तक सीमित है और इसका असर जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है।
जानकारी के अनुसार, कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में रखने की योजना भी फंड की कमी के कारण अधर में लटकी हुई है। पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट द्वारा पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग को पर्याप्त फंड जारी नहीं किया जा रहा, जिसके चलते कई परियोजनाएं रुकी हुई हैं।
नगर निगम के पास 835 डॉग फीडिंग प्वाइंट की सूची तो है, लेकिन उनमें से अधिकांश को अब तक आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है। बताया जा रहा है कि हर फीडिंग प्वाइंट पर साइनबोर्ड लगाने के लिए 10 से 12 हजार रुपये खर्च होने हैं, लेकिन इसके लिए भी बजट जारी नहीं हुआ है।
वहीं, बेला रोड पर प्रस्तावित डॉग शेल्टर का निर्माण भी फंड के अभाव में लंबित है। इसी तरह द्वारका में करीब 1500 खतरनाक आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर बनाने की योजना भी फाइलों में अटकी हुई है।
हालांकि, निगम अब आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए नई योजना पर काम कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष 20 करोड़ रुपये के बजट से कुत्तों के बंध्याकरण के साथ माइक्रोचिप लगाने की योजना शुरू की जाएगी। इस माइक्रोचिप के जरिए कुत्तों की पहचान, लोकेशन और बंध्याकरण से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज की जाएगी, जिसे स्कैन कर आसानी से देखा जा सकेगा।
फिलहाल, इलाके के लोग जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि इस बढ़ती समस्या से राहत मिल सके और क्षेत्र में सामान्य जीवन बहाल हो सके।