नंदग्राम थाना क्षेत्र के एक गांव में चार साल की बच्ची की दरिंदगी के बाद हत्या की वारदात पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी उत्तर प्रदेश को महिला अधिकारियों की एसआईटी गठित कर दो सप्ताह में पूरक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा।
अब एक नजर पूरे मामले पर
गाजियाबाद कमिश्नरेट के नंदग्राम थाना क्षेत्र के एक गांव में 16 मार्च को बच्चों के साथ मैदान में खेल रही चार साल की बच्ची को पड़ोसी गौरव प्रजापति चॉकलेट दिलाने के बहाने से झाड़ियों में ले गया था और सूखे नशे में बच्ची से दरिंदगी करने पर बाद ईंट से प्रहार कर मौत के घाट उतार दिया था। इस वारदात ने आसपास के लोगों को झकझोर दिया था, लेकिन इस मामले में पुलिस का रवैया बड़ा ही अशोभनीय रहा। पुलिस ने शुरुआत में ही पोक्सो व दुष्कर्म की बात को नकार दिया और सिर्फ हत्या में मुकदमा दर्ज किया, जबकि बच्ची लहूलुहान हालत में मिली थी, लेकिन जिम्मेदार पुलिस अधिकारी ने घटनास्थल की पड़ताल करने के बाद भी मामले की गंभीरता को नहीं समझा। पुलिस पर पीड़ित पिता और गवाहों को धमकाने के आरोप थे।
ऐसे पहुंचा मामला सुप्रीम कोर्ट
इस जघन्य अपराध की जानकारी मिलने पर सीनियर जर्नलिस्ट एवं सोशल वर्कर सारा अशरफ प्रयाग मिश्रा पीड़ित पिता से मिली थी। उन्होंने पीड़ित पिता को सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सिद्धार्थ यादव से मिलवाया। अधिवक्ता सिद्धार्थ यादव के अनुसार पूरा मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाया तो गाजियाबाद कमिश्नरेट पुलिस की नींद टूटी। इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद कमिश्नरेट पुलिस की सत्यनिष्ठा पर संदेह भी जताया है। उन्होंने बताया, इस मामले में दो अस्पतालों की भूमिका भी संदेह में है, जहां पीड़ित पिता बच्ची को लेकर गए थे। उस समय बच्ची जिंदा थी, लेकिन दोनों अस्पतालों के डॉक्टरों ने बच्ची को देखना तो दूर छूने का प्रयास भी नहीं किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने यह दिए आदेश
अधिवक्ता सिद्धार्थ यादव ने बताया, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी को इस जघन्य अपराध की जांच के लिए एसआईटी गठित करने के आदेश दिए है, जिसमें पुलिस आयुक्त या पुलिस महानिरीक्षक रैंक की एक महिला पुलिस अधिकारी। पुलिस अधीक्षक या अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रैंक की एक महिला अधिकारी और एक महिला उप पुलिस अधीक्षक या पुलिस निरीक्षक रहेंगी। बिना देर के एसआईटी शनिवार से जांच करेगी। उन्होंने बताया, एसआईटी पीड़ित बच्चे के माता-पिता की ओर से उठाई गई सभी शिकायतों, विशेष रूप से महत्वपूर्ण गवाहों की सुरक्षा से संबंधित शिकायतों पर गौर करेगी। एसआईटी को इस मामले में दो निजी अस्पतालों के स्पष्टीकरण एवं बचाव सहित सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच करने के आदेश भी दिए गए है। सुप्रीम अदालत ने कहा है कि एसआईटी द्वारा पूरक रिपोर्ट दाखिल करने के बाद न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) के समक्ष अनुपालन हलफनामा दाखिल करेगी। अधिवक्ता सिद्धार्थ यादव ने बताया, सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह में जांच को पूरा करने के लिए कहा है।