Supreme Court Patna HC Verdict : पटना हाई कोर्ट के उस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसके सीने को दबाने की घटना को दुष्कर्म का प्रयास नहीं माना गया था। 23 सितंबर को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को सुने बिना फैसले को रद्द करने से इनकार किया।
HC के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की नजर
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के 9 जुलाई 2026 के फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया है। हाई कोर्ट ने 2008 के बांका मामले में आरोपी की अपील स्वीकार करते हुए दुष्कर्म के प्रयास से जुड़ी सजा को रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बिहार के एडवोकेट जनरल एसडी संजय से कहा कि आरोपी को नोटिस की तामील स्थानीय पुलिस की मदद से सुनिश्चित की जाए।
स्टूडियो में महिला से क्या हुआ
मामला बांका जिले के एक फोटो स्टूडियो से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, महिला अपने पिता के साथ फोटो खिंचवाने वहां गई थी। आरोपी ने उसके पिता को बाहर इंतजार करने के लिए कहा और स्टूडियो का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। आरोप था कि उसने महिला की सलवार उतारने की कोशिश की और उसके सीने को दबाकर शारीरिक छेड़छाड़ की। महिला के शोर मचाने पर उसके पिता ने दरवाजा खोलने की कोशिश की, जिसके बाद आरोपी वहां से भाग गया।
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HC ने किस आधार पर फैसला दिया
पटना हाई कोर्ट ने कहा था कि उपलब्ध साक्ष्यों से दुष्कर्म के प्रयास का अपराध साबित करने के लिए जरूरी स्पष्ट कृत्य सामने नहीं आया। अदालत ने कहा कि घटना में महिला को कमरे में बंद करना, सलवार उतारने की कोशिश करना और उसके सीने को दबाना उसकी गरिमा भंग करने वाले कृत्य हैं और ये भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत आते हैं। इसी आधार पर धारा 376 के साथ धारा 511 के तहत दी गई सजा को टिकाऊ नहीं माना गया।
इलाहाबाद HC के फैसले का भी जिक्र
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं शोभा गुप्ता और एचएस फुल्का ने पहले के एक मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले में नाबालिग लड़की के साथ यौन दुर्व्यवहार के आरोपों को दुष्कर्म का प्रयास नहीं माना गया था। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में उस फैसले को रद्द किया और यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई में संवेदनशीलता बरतने पर जोर दिया था। अब पटना हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट आगे सुनवाई करेगा।