नीट पेपर लीक मामले से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और पुलिस कार्रवाई को लेकर अहम टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि केवल प्रदर्शन होने के आधार पर लाठीचार्ज नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले को केवल एक स्थान तक सीमित नहीं मानता, बल्कि देशभर में ऐसे मामलों के लिए एक समान दिशा-निर्देश तैयार करने पर विचार करेगा। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।
देशभर के प्रदर्शनों पर होगी एक साथ सुनवाई
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह मामला किसी एक स्थान तक सीमित नहीं है। अदालत के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी सभी याचिकाओं पर एक साथ विचार किया जाएगा। कोर्ट ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में पूरे देश के लिए समान गाइडलाइन तैयार की जाएगी।
लाठीचार्ज पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी विरोध-प्रदर्शन के दौरान केवल भीड़ जुटने या प्रदर्शन होने के आधार पर लाठीचार्ज करना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत का कहना था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उपाय लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप होने चाहिए।
पुलिस की तैयारी पर भी उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान पीठ ने यह सवाल भी उठाया कि बड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और संसाधन क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए। अदालत ने कहा कि यदि किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन में असामाजिक तत्व शामिल हो जाते हैं, तो उस स्थिति से निपटने के लिए भी स्पष्ट और संतुलित व्यवस्था होनी चाहिए।
शांतिपूर्ण विरोध संवैधानिक अधिकार
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है और इसकी रक्षा करना आवश्यक है। अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की आवाज को सम्मान मिलना चाहिए और प्रशासनिक कार्रवाई भी संवैधानिक दायरे में रहकर ही की जानी चाहिए।
दोनों पक्षों की निष्पक्ष जांच पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस या प्रदर्शनकारियों, किसी भी पक्ष की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग या अनुचित कार्रवाई के आरोप सामने आते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखना कानून के शासन के लिए आवश्यक है।