Supreme Court Rejects: सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी को फ्रीज किए गए बैंक खातों के संचालन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया और उसे मामले पर जल्द निर्णय लेने को कहा। इस विवाद में पार्टी के बैंक खातों के संचालन, चुनाव आयोग के आदेश और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर अलग-अलग दलीलें पेश की गईं। टीएमसी का कहना है कि खातों पर रोक से उसके रोजमर्रा के प्रशासनिक और कानूनी खर्च प्रभावित हो रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार ने जांच से जुड़े आरोपों का हवाला देते हुए खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई का बचाव किया।
चुनाव चिह्न के आदेश और बैंक खातों पर विवाद
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में यह तय करना जरूरी है कि मौजूदा परिस्थितियों में बैंक खातों के संचालन का अधिकार किसे दिया जा सकता है। टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि चुनाव आयोग का आदेश पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से संबंधित है, उसमें बैंक खातों के संचालन पर स्पष्ट निर्देश नहीं दिया गया। पार्टी की ओर से सामान्य खर्चों के लिए धन उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था में बदलाव करने के बजाय हाईकोर्ट को शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने बनाई थी सीमित भुगतान की व्यवस्था
बैंक खाते फ्रीज होने के बाद टीएमसी ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया था। जुलाई में हाईकोर्ट ने तीन खातों के सीमित संचालन के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी नियुक्त किया। इस व्यवस्था के तहत पार्टी के रोजमर्रा के खर्चों के लिए भुगतान की निगरानी की जानी थी। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के कारण मामला और जटिल हो गया। संबंधित खातों को धनशोधन जांच के तहत फ्रीज किए जाने का मुद्दा भी अदालत के सामने आया। अब हाईकोर्ट को इस विवाद पर आगे निर्णय लेना है।
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शिकायत के बाद शुरू हुई पुलिस और ईडी की जांच
मामले की शुरुआत पश्चिम बंगाल के बागी टीएमसी विधायक विश्वनाथ दास की शिकायत से जुड़ी बताई गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 18 जून 2026 को बिधाननगर साइबर अपराध थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि कथित अवैध गतिविधियों से संबंधित धन पार्टी से जुड़े कुछ बैंक खातों में पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर खातों को फ्रीज किया। मामले में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएं लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई। बाद में ईडी ने भी जांच शुरू की। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
केंद्र ने 35 करोड़ रुपये का उठाया मुद्दा
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जांच का हवाला देते हुए कथित तौर पर 35 करोड़ रुपये नकद जमा किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने एक पार्टी पदाधिकारी के निजी सहायक से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। केंद्र की ओर से सरकारी जमीन के कथित दुरुपयोग से संबंधित आरोपों का जिक्र भी किया गया। दूसरी ओर, टीएमसी ने अपने नियमित खर्च चलाने में परेशानी होने की दलील दी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने बैंक खातों को संचालित करने की मांग स्वीकार नहीं की है। मामले में आगे की कानूनी स्थिति कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले और जांच की प्रगति पर निर्भर करेगी।