सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि क्या ड्यूटी पर रहते हुए ईडी अधिकारियों के अधिकार समाप्त हो जाते हैं? ईडी ने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी और उनके अधिकारियों ने आई-पैक के दफ्तरों में चल रही जांच और तलाशी अभियानों में दखल दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईडी के अधिकारियों के भी मौलिक अधिकार हैं और उन्हें केवल नौकरी के कारण नागरिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने ममता बनर्जी सरकार से पूछा कि अगर केंद्र में उनकी सरकार हो और राज्य स्तर पर कोई दूसरी राजनीतिक पार्टी ऐसा ही करे तो क्या होगा?
ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) को कई अधिकार मिले हुए हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:
मौलिक अधिकारों की रक्षा: ईडी के अधिकारियों के भी मौलिक अधिकार हैं और उन्हें केवल नौकरी के कारण नागरिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 32 के तहत याचिका: ईडी अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकती है, लेकिन यह अधिकार सीमित है।
छापेमारी और जांच: ईडी को छापेमारी और जांच करने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार भी सीमित है और इसके लिए अदालत की अनुमति लेनी होती है।
अदालत के विवेक पर निर्भर करता है
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा है कि ईडी के अधिकारियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि ईडी की याचिका की वैधता पर सवाल उठाया जा सकता है, लेकिन यह अदालत के विवेक पर निर्भर करता है।
अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता
ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के अधिकारों का उल्लंघन तब हो सकता है जब कोई व्यक्ति या संगठन ईडी की जांच में बाधा डालता है या ईडी अधिकारियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा है कि ईडी अधिकारियों के भी मौलिक अधिकार हैं और उन्हें केवल नौकरी के कारण नागरिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
याचिका की वैधता पर सवाल उठाया
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर मुख्यमंत्री या कोई अन्य व्यक्ति ईडी की जांच में बाधा डालता है, तो ईडी राज्य पुलिस के पास जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की याचिका की वैधता पर सवाल उठाया है और पूछा है कि क्या ईडी अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट आ सकती है।