प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि केवल पैलेट गन पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके उपयोग के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तय किए जाने की आवश्यकता है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और जंतर-मंतर पर हुई कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं।
पैलेट गन के इस्तेमाल पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। अदालत ने जंतर-मंतर पर तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के हथियारों, गोला-बारूद और ड्यूटी पर तैनात कर्मियों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी पूछा कि पैलेट गन के इस्तेमाल के लिए मौजूदा मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) क्या है और किन परिस्थितियों में इसका उपयोग किया जाता है।
कोर्ट बोला- प्रतिबंध नहीं, स्पष्ट गाइडलाइन की जरूरत
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यदि याचिका का उद्देश्य अत्यधिक बल प्रयोग को रोकना है, तो मांग केवल पैलेट गन पर प्रतिबंध लगाने की नहीं, बल्कि उसके इस्तेमाल के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तय कराने की होनी चाहिए। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को अपनी याचिका में आवश्यक संशोधन करने की सलाह दी और कहा कि इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जा सकते हैं।
मेटैलिक पैलेट से गंभीर चोट का दावा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि इस मामले में मेटैलिक पैलेट का इस्तेमाल किया गया, जिससे प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आईं। दलील दी गई कि पैलेट कई प्रकार के होते हैं, जिनमें रबर, प्लास्टिक और धातु के पैलेट शामिल हैं, लेकिन धातु के पैलेट शरीर को अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान ऐसे पैलेट का इस्तेमाल उचित नहीं था।
ग्रेडेड रिस्पॉन्स पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ परिस्थितियों में 'ग्रेडेड रिस्पॉन्स' यानी क्रमिक बल प्रयोग की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी कार्रवाई में आवश्यकता से अधिक बल का प्रयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि मौजूदा नियमों को चुनौती नहीं दी जाती, तो यह देखना होगा कि संबंधित घटना में पैलेट गन का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के अनुरूप हुआ या नहीं।
घायलों के इलाज और मुआवजे की भी उठी मांग
याचिका में पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के साथ-साथ जंतर-मंतर पर घायल हुए प्रदर्शनकारियों को उचित उपचार और मुआवजा देने की मांग भी की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने घायल व्यक्ति के बेहतर इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। फिलहाल अदालत ने केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है और संकेत दिया है कि भविष्य में पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश और प्रोटोकॉल तय करने पर विचार किया जा सकता है।