
Supreme Court Notice: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार 1 सितंबर 2025 को देशभर के स्कूलों में ट्रांसजेंडर समावेशी यौन शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) और कई राज्यों से जवाब मांगा है। यह याचिका दिल्ली की वसंत वैली स्कूल की कक्षा 12वीं की छात्रा काव्या मुखर्जी साहा ने दायर की है। यह याचिका अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है।
क्लास 12 के छात्र दर्ज की याचिका
काव्या मुखर्जी साहा ने अपनी याचिका में मांग की थी कि विद्यालयों में यौन शिक्षा में ट्रांसजेंडर और लैंगिक विविधता को समाहित किया जाए। उनका कहना है कि स्कूल की किताबों में ट्रांसजेंडर से जुड़ी पढ़ाई हटा दी गई है। इससे बच्चों को सही और जरूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है और वे समावेशिता सीखने से वंचित हो रहे हैं। उनका तर्क है कि जब तक बच्चों को शुरुआती शिक्षा से ही जेंडर संवेदनशीलता और विविधता की समझ नहीं दी जाएगी, तब तक समाज में समानता और स्वीकार्यता लाना मुश्किल होगा।
इन आदेशों को लागू नहीं किया गया
याचिका में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2014 में नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी बनाम भारत सरकार मामले में स्पष्ट निर्देश दिया था कि ट्रांसजेंडर-समावेशी शिक्षा को लागू किया जाए। लेकिन आज तक इन आदेशों को लागू नहीं किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और अधिवक्ता विशाल सिन्हा की सहायता से पेश हुए। शंकरनारायणन ने दलील दी है कि इस न्यायालय के निर्देशों और स्पष्ट वैधानिक आवश्यकताओं के बावजूद सरकार कह रही है कि हम इसे लागू नहीं कर रहे हैं, यह बहुत दुखद स्थिति है। उन्होंने आगे कहा कि एक आरटीआई आवेदन के जवाब में एनसीईआरटी ने दावा किया कि उसे सर्वोच्च न्यायालय के पिछले आदेशों की जानकारी नहीं थी।
इन राज्यों पर लगा आरोप
याचिका में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब, तमिलनाडु और कर्नाटक की पाठ्यपुस्तकों का हवाला दिया गया है, जिनमें इन विषयों को व्यवस्थित रूप से नजरअंदाज किया गया है। जिसमें केरल आंशिक अपवाद है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए सभी पक्षों से जवाब मांगा है। अगर कोर्ट इस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश देता है तो यह देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।