सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल से जुड़े SIR मामले की सुनवाई के दौरान सियासी और कानूनी टकराव खुलकर सामने आया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया, माइक्रो ऑब्जर्वरों की नियुक्ति और नोटिस जारी करने के तरीकों पर सवाल उठाए, वहीं चुनाव आयोग ने इसे नियमों के तहत की गई कार्रवाई बताया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनते हुए अगली सुनवाई सोमवार को तय की है।
सुनवाई की शुरुआत और कोर्ट का रुख
SIR याचिका पर सुनवाई शुरू होते ही अदालत में माहौल गर्म रहा। ममता बनर्जी खुद अदालत में मौजूद रहीं और उन्होंने पीठ के सामने अपनी बात रखने की अनुमति मांगी, जिस पर उन्हें सीमित समय दिया गया। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि सभी पक्षों को सुना जाएगा और चुनाव आयोग को याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। अदालत ने फिलहाल किसी अंतिम फैसले से पहले तथ्यों की पूरी पड़ताल पर जोर दिया।
माइक्रो ऑब्जर्वरों को लेकर विवाद
ममता बनर्जी और याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि हजारों माइक्रो ऑब्जर्वरों की नियुक्ति बिना ठोस कानूनी आधार के की गई है। उनका कहना था कि इससे राज्य प्रशासन पर अनावश्यक दबाव पड़ा और प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए। दूसरी ओर चुनाव आयोग के वकील ने दलील दी कि जब राज्य का सहयोग पर्याप्त न हो, तब नियमों के तहत ऐसे कदम उठाए जाते हैं और अब तक करोड़ों मामलों की सुनवाई हो चुकी है।
नामों की स्पेलिंग और नोटिस का मुद्दा
सुनवाई के दौरान सबसे बड़ा विवाद मतदाता सूची में नामों की वर्तनी से जुड़ा रहा। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने बताया कि लाखों लोगों को केवल नाम या सरनेम में अंतर के कारण नोटिस भेजे गए हैं। अदालत ने इस पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की बात कही और उदाहरण देते हुए बताया कि अलग-अलग क्षेत्रों में उच्चारण बदलने से स्पेलिंग में फर्क आ सकता है, इसलिए हर मामले को सावधानी से देखा जाना चाहिए।
ममता की सीधी दलील और अंतरिम मांग
मुख्यमंत्री ने अदालत से आग्रह किया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। उन्होंने इसे लोकतंत्र बचाने की लड़ाई बताते हुए कहा कि शादी के बाद सरनेम बदलने जैसी सामान्य स्थितियों को भी असंगति मान लिया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बड़ी संख्या में BLO पर दबाव पड़ा है और कुछ गंभीर घटनाएं भी सामने आई हैं, जिन पर न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है।
अगली सुनवाई और आगे की राह
अदालत ने चुनाव आयोग को शीघ्र जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई सोमवार को तय कर दी। फिलहाल किसी अंतरिम आदेश पर अंतिम फैसला सुरक्षित रखा गया है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि अगली तारीख पर अदालत किन बिंदुओं को निर्णायक मानती है और SIR प्रक्रिया को लेकर क्या दिशा तय होती है।