राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उसकी जमानत पर तत्काल रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि केवल आरोप की गंभीरता के आधार पर पहले से मिली जमानत को तुरंत रद्द करना उचित नहीं होगा। हालांकि, अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश पर कुछ सवाल भी उठाए हैं और मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को तय की है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल बरकरार रखी जमानत
राजा रघुवंशी हत्याकांड में सोनम रघुवंशी की जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से मना कर दिया। न्यायालय के समक्ष यह जानकारी भी रखी गई कि सोनम जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आ चुकी है और अदालत द्वारा तय शर्तों का पालन करते हुए शिलांग में रह रही है। ऐसे में उसे दोबारा जेल भेजना इस चरण में उचित नहीं माना गया। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी।
मेघालय सरकार ने जमानत को दी चुनौती
राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका में हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को बरकरार रखा गया था। सरकार की ओर से पेश पक्ष ने आरोप लगाया कि सोनम पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रचने और वारदात के बाद फरार होने के गंभीर आरोप हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि उसके बाहर रहने से जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
चार्जशीट और निचली अदालतों के आदेश का दिया गया हवाला
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि आरोपपत्र में सोनम के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। यह भी बताया गया कि निचली अदालतों ने उसकी जमानत याचिका कई बार खारिज की थी। याचिका में आशंका जताई गई कि आरोपी के बाहर रहने से गवाहों पर प्रभाव डालने, सबूतों से छेड़छाड़ करने या फरार होने का जोखिम बना रह सकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज में केवल एक कानूनी धारा का उल्लेख गलत होने जैसी तकनीकी त्रुटि के आधार पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी।
हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह जरूर कहा कि हाई कोर्ट के आदेश के कुछ पहलुओं पर उसे आपत्ति है। अदालत ने संकेत दिया कि वह जमानत देने के आधारों की विस्तार से समीक्षा करेगी। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया कि जब आरोपी पहले ही जमानत पर रिहा हो चुकी है और निर्धारित शर्तों का पालन कर रही है, तब केवल आरोप की गंभीरता के आधार पर तत्काल जमानत पर रोक लगाना न्यायिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
गिरफ्तारी प्रक्रिया बनी विवाद का केंद्र
इस मामले में पहले शिलांग की अदालत और बाद में हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया में खामियां पाए जाने का उल्लेख किया था। अदालतों का कहना था कि गिरफ्तारी के आधार आरोपी को विधि सम्मत तरीके से नहीं बताए गए, जिससे उसके कानूनी अधिकार प्रभावित हुए। इसी आधार पर जमानत दी गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले में कानूनी पहलुओं की समीक्षा करेगा और 10 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में आगे का निर्णय लिया जाएगा।