UGC new regulations: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए रेगुलेशन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। गुरुवार को हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने रेगुलेशन की भाषा को अस्पष्ट बताते हुए उस पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामला पूरी तरह खारिज नहीं हुआ है और इसकी अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। इस फैसले के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपने-अपने नजरिए से प्रतिक्रिया दी है।
टीएमसी की सहमति
तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि नई गाइडलाइंस संविधान की भावना के अनुरूप नहीं थीं। उनके अनुसार अदालत ने हस्तक्षेप कर सही कदम उठाया है और इससे छात्रों के हितों की रक्षा होगी।
#WATCH | Delhi | SC stays UGC regulations 2026, RLP MP Hanuman Beniwal says,"...When the UGC made the rules, the government had information about it, now the government should take a stand in the Supreme Court. Those who rag or insult any student, including SC/ST/OBC students,… pic.twitter.com/yAVOI9vjmt
— ANI (@ANI) January 29, 2026
कांग्रेस का हमला
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार को सामाजिक सौहार्द बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन वह असल मुद्दों से ध्यान हटाने का प्रयास करती है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के लिए आभार जताते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया।
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फिर चर्चा की मांग
कांग्रेस की ही सांसद रंजीत रंजन ने इस विषय को बेहद संवेदनशील बताया। उनका कहना है कि नियमों पर दोबारा विचार जरूरी है ताकि किसी भी छात्र को जाति या वर्ग के आधार पर भेदभाव का सामना न करना पड़े और समानता सुनिश्चित हो सके।
सरकार का पक्ष
योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए कहा कि यह केवल अंतरिम रोक है, अंतिम फैसला अभी बाकी है। वहीं RLP सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की और सभी वर्गों के छात्रों की गरिमा की रक्षा पर जोर दिया।