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Supreme Court strict on CCTV cameras: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के पुलिस थानों और जांच एजेंसियों के दफ्तरों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने पूछा कि अब तक कितने थानों और एजेंसियों में कैमरे लगाए गए हैं, वे काम कर रहे हैं या नहीं और उनकी रिकॉर्डिंग कितने समय तक सुरक्षित रखी जा रही है। अदालत ने साफ कहा कि सीसीटीवी की मौजूदगी पुलिस हिरासत में होने वाली अमानवीय घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी है और इस पर अब देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
खराब क्वालिटी और अधूरी व्यवस्था
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने बताया कि देश के अधिकतर थानों और एजेंसियों के कार्यालयों में कैमरे या तो लगाए ही नहीं गए हैं या फिर खराब हालत में हैं। कई जगह उनकी गुणवत्ता इतनी कमजोर है कि न तो तस्वीर साफ आती है और न ही ऑडियो सही तरीके से रिकॉर्ड होती है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही 2020 में सीबीआई, ईडी, एनआईए समेत अन्य एजेंसियों के दफ्तरों में कैमरे लगाने का निर्देश दिया था, लेकिन स्थिति अब भी संतोषजनक नहीं है।
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हिरासत में पारदर्शिता का उद्देश्य
कोर्ट ने दोहराया कि हर थाने में प्रवेश-द्वार, लॉक-अप, कॉरिडोर, लॉबी और रिसेप्शन जैसी जगहों पर कैमरे लगना अनिवार्य है। इसका मकसद हिरासत के दौरान पारदर्शिता बनाए रखना और मानवाधिकार उल्लंघन पर अंकुश लगाना है। अदालत ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज जांच और अदालती प्रक्रिया में अहम सबूत साबित हो सकती है, इसलिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को तुरंत इस पर कार्रवाई करनी होगी।