Supreme Court strict: देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ते हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने हाईवे किनारे बने अवैध ढाबों, दुकानों और अन्य अतिक्रमणों को 60 दिनों के भीतर हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सुरक्षित यात्रा नागरिकों के जीवन के अधिकार का हिस्सा है और प्रशासनिक लापरवाही के कारण सड़कें खतरे का कारण नहीं बन सकतीं।
60 दिन में हटेंगे अवैध अतिक्रमण
सुप्रीम कोर्ट ने जिला प्रशासन को आदेश दिया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के ‘राइट ऑफ वे’ में आने वाले सभी अवैध निर्माण, जैसे ढाबे और व्यावसायिक ढांचे, तय समयसीमा में हटाए जाएं। साथ ही, भविष्य में बिना अनुमति कोई नया लाइसेंस या एनओसी जारी करने पर रोक लगा दी गई है।
लाइसेंस की होगी समीक्षा
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि मौजूदा लाइसेंसों की 30 दिनों के भीतर समीक्षा की जाए। National Highways Authority of India और संबंधित विभागों की मंजूरी के बिना किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि को अनुमति नहीं दी जाएगी।
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हाइवे पर बढ़ेगी सुरक्षा व्यवस्था
अदालत ने हर 75 किलोमीटर पर एंबुलेंस और रिकवरी क्रेन तैनात करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा हाईवे पर विश्राम स्थल, शौचालय, सुरक्षित पार्किंग और स्पष्ट संकेतक अनिवार्य होंगे। 4 और 6 लेन सड़कों पर एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने को भी कहा गया है।
ब्लैकस्पॉट की पहचान और सुधार
सुप्रीम कोर्ट ने दुर्घटना संभावित स्थानों (ब्लैकस्पॉट) की पहचान कर 45 दिनों में सूची जारी करने के निर्देश दिए हैं। इन जगहों पर बेहतर लाइटिंग, कैमरे और चेतावनी संकेत लगाए जाएंगे, ताकि हादसों को रोका जा सके। कोर्ट ने केंद्र सरकार से अंतरराज्यीय समन्वय पर भी रिपोर्ट मांगी है, जिससे सड़क सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।