दिल्ली-एनसीआर में घर का सपना देख रहे करीब 51,000 परिवारों के लिए बड़ी राहत आई है। सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक के अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा कराने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट के आदेश के बाद अब इन सभी अटके प्रोजेक्ट्स का निर्माण सरकारी कंपनी एनबीसीसी करेगी। सालों से किराए और ईएमआई के बोझ तले दबे खरीदारों के लिए यह फैसला किसी उम्मीद की किरण से कम नहीं है।
कैसे फंसे हजारों खरीदार
सुपरटेक ने 2009 से 2011 के बीच नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बड़े-बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट लॉन्च किए। सुपरटेक ने प्रीमियम घरों का सपना दिखाकर हजारों करोड़ रुपये जुटाए। लोगों ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी लगा दी, लेकिन साल बीतते गए और घर की चाबी नहीं मिली। जिन बच्चों के लिए घर खरीदा गया था, वे आज कॉलेज पहुंच गए, लेकिन परिवार अब भी अधूरे फ्लैट्स का इंतजार कर रहे थे।
इमेराल्ड कोर्ट से शुरू हुआ पतन
सुपरटेक की मुश्किलें तब बढ़ीं जब नोएडा के सेक्टर-93A स्थित इमेराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट में नियमों को नजरअंदाज कर ऊंचे टावर बना दिए गए। मामला अदालत पहुंचा और आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने टावरों को अवैध बताते हुए गिराने का आदेश दिया। 2022 में इन टावरों के गिरते ही कंपनी की साख पूरी तरह टूट गई और खरीदारों का भरोसा भी।
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कर्ज, जांच और गिरफ्तारी
इसके बाद सुपरटेक पर बैंकों का हजारों करोड़ का कर्ज चढ़ गया। दिवालिया प्रक्रिया शुरू हुई और कई प्रोजेक्ट्स पूरी तरह रुक गए। प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। आरोप लगे कि खरीदारों का पैसा दूसरी कंपनियों में घुमा दिया गया। कंपनी के चेयरमैन की गिरफ्तारी के बाद प्रबंधन भी बिखर गया और निर्माण ठप हो गया।
NBCC को सौंपी गई जिम्मेदारी
जब साफ हो गया कि सुपरटेक अपने दम पर कुछ नहीं कर पाएगा, तब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त कदम उठाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी अधूरे प्रोजेक्ट अब एनबीसीसी पूरी करेगी। अदालत ने तय समयसीमा भी दी है कि अगले 2 साल में 51,000 फ्लैट तैयार किए जाएं। तब तक एनबीसीसी कोई नया काम नहीं लेगी और पूरी ताकत इसी मिशन में लगाएगी।
खरीदारों के लिए नई शुरुआत
सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ घर दिलाने का रास्ता नहीं खोला, बल्कि बैंकों और बिल्डर की कथित साठगांठ की सीबीआई जांच के भी आदेश दिए हैं। यह फैसला उन हजारों परिवारों के लिए नई शुरुआत है, जो सालों से दफ्तरों और अदालतों के चक्कर काट रहे थे। अब उम्मीद है कि जल्द ही अधूरे ढांचे घरों में बदलेंगे और 15 साल का इंतजार खत्म होगा।