Cancer Medicine Prices: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की ज्यादा कीमत और दुकानदारों के भारी मुनाफे पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि जिस दवा को दुकानदार 2,700 रुपये में खरीदता है। उस पर 27,000 रुपये का एमआरपी छापा जा रहा है। कीमत में यह 10 गुना अंतर मरीजों से सीधा उगाही और दिनदहाड़े डकैती के समान है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह टिप्पणी किशन चंद जैन और संजय कुलश्रेष्ठ की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की।
याचिकाकार्ता ने क्या कहा?
इन याचिकाओं में ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO), 2013 की कमियों का मसला उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा नियमों में कुछ जरूरी दवाओं यानी शेड्यूल्ड ड्रग्स की कीमतें तय होती हैं, लेकिन गैर-शेड्यूल्ड दवाओं की शुरुआती कीमतों पर सरकार का प्रभावी नियंत्रण नहीं है। याचिकाकर्ता किशन चंद जैन ने बताया कि देश में बिकने वाली कुल दवाओं में से केवल 17% ही शेड्यूल्ड ड्रग्स की श्रेणी में आती हैं, जिनकी कीमतें सरकार तय करती है। बाकी 83% गैर-शेड्यूल्ड दवाओं की शुरुआती कीमत तय करने पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। कंपनियां मनचाहा दाम तय कर देती हैं, जिससे रिटेलर्स और निजी अस्पतालों को मोटा मुनाफा मिलता है।
इलाज के लिए गहने-घर बेचने के लिए मजबूर मरीज
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि जीवन रक्षक दवाओं के दाम इतने ज्यादा हैं कि आम लोगों को अपनों के इलाज के लिए अपने गहने और घर तक बेचने पड़े रहे हैं। इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने सवाल उठाया कि सरकारी नियामक संस्थाएं इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है?
सरकारी खजाने पर भी पड़ रहा बेवजह बोझ
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसका नुकसान सिर्फ आम मरीज ही नहीं झेल रहे, बल्कि टैक्सपेयर्स का पैसा भी बर्बाद हो रहा है। आयुष्मान भारत जैसी सरकारी योजनाओं के तहत अब मरीज इलाज कराते हैं, तो अस्पताल सरकार से इन दवाओं की ऊंची एमआरपी पर क्लेम लेते हैं, जिससे सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ता है।
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दवा कंपनियों की सफाई
दवा निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह सारा मुनाफा कंपनियां नहीं कमा रही हैं, बल्कि इसमें रिटेलर और अस्पताल के स्तार पर मिलने वाला बड़ा मार्जिन शामिल है।
29 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
बता दें कि केंद्र सरकार की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के एम. नटराज के आश्वासन दिया कि सरकार इसे मुद्दे को बेहद गंभीरता से ले रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इस मामले पर जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 29 सितंबर को तय की है।