Supreme Court Takes a Tough Stand: बिल्डरों और बैंकों से जुड़े होम लोन सबवेंशन मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जजों, एमिकस क्यूरी और वकीलों के खिलाफ भेजी जा रही गुमनाम शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर इन शिकायतों के पीछे किसी बिल्डर या उसके लिए काम करने वाले व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो मामले की जांच कराई जा सकती है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।
शिकायतों के पीछे कौन, कोर्ट करेगा पड़ताल
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसी शिकायतों का इस्तेमाल न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव बनाने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को शिकायतों का एक सेट सौंपते हुए उनके पीछे मौजूद लोगों का पता लगाने को कहा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी बिल्डर या उसके सहयोगी की भूमिका सामने आती है तो कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
1200 से ज्यादा होमबायर्स की शिकायतों से शुरू हुआ मामला
यह पूरा मामला बड़ी संख्या में घर खरीदारों की शिकायतों के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक 1,200 से अधिक होमबायर्स ने ऐसी योजनाओं से जुड़ी परेशानियां सामने रखी थीं। शिकायतों में मुख्य रूप से यह आरोप था कि कई प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हुए, लेकिन खरीदारों को बैंक की ईएमआई चुकानी पड़ती रही। 29 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की प्रारंभिक जांच के बाद सीबीआई को संबंधित मामलों की जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था।
सबवेंशन स्कीम पर भी उठे गंभीर सवाल
सुप्रीम कोर्ट के सामने आरोप था कि कुछ मामलों में निर्माण पूरा होने से पहले ही बैंकों या वित्तीय संस्थानों की ओर से बिल्डरों को लोन की बड़ी रकम जारी कर दी गई। अदालत के रिकॉर्ड में सबवेंशन योजनाओं के तहत बैंकों द्वारा निर्माण की स्थिति और भुगतान प्रक्रिया की जांच की जरूरत का उल्लेख है। मामले में यह भी जांच का विषय बना कि ऐसे समझौतों में होमबायर्स को जोखिमों की पर्याप्त जानकारी दी गई थी या नहीं।
सीबीआई ने दर्ज कीं 50 एफआईआर
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि सीबीआई अब तक इस मामले में 50 एफआईआर दर्ज कर चुकी है। इनमें 18 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 17 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई है और एक मामले में क्लोजर रिपोर्ट दी गई है। पांच मामलों में वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हुई और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कार्रवाई की गई। अगस्त 2026 के सुप्रीम कोर्ट रिकॉर्ड में भी 50 एफआईआर, 18 पूरी जांच, 17 चार्जशीट और एक क्लोजर रिपोर्ट का उल्लेख है।