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नॉएडा में अथॉरिटी और बिल्डरों के बीच सालों से चल रही कथित सांठगांठ का पर्दाफाश करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की खंडपीठ ने नोएडा अथॉरिटी में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों की जांच के लिए तीन सदस्यीय नई विशेष जांच टीम (SIT) गठन का ऐतिहासिक आदेश दिया।
इसके साथ ही, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोएडा अथॉरिटी को महानगर परिषद में बदलने पर विचार करने का निर्देश दिया, ताकि शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो। यह फैसला न केवल भ्रष्टाचार पर नकेल कसेगा, बल्कि किसानों और मध्यमवर्गीय फ्लैट खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।
भ्रष्टाचार का मकड़जाल: 117 करोड़ का मुआवजा घोटाला
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश नोएडा अथॉरिटी के एक पूर्व कानूनी अधिकारी द्वारा 2021 में 7.28 करोड़ रुपये के अनुचित मुआवजे की मंजूरी के मामले की सुनवाई के दौरान आया।
इससे पहले जनवरी 2024 में गठित SIT ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया कि नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों ने बिल्डरों के साथ मिलकर 20 मामलों में 117 करोड़ रुपये का अत्यधिक मुआवजा गलत लोगों को दिया।
SIT ने यह भी कहा कि अधिकारियों और लाभार्थियों के बीच संभावित सांठगांठ की जांच की आवश्यकता है।
सुप्रीम कोर्ट के सात अहम निर्देश
नई SIT का गठन – उत्तर प्रदेश के DGP को तीन IPS अधिकारियों की नई SIT बनाने का आदेश, जिसमें फॉरेंसिक और EoW विशेषज्ञ होंगे।
पर्यावरणीय मंजूरी अनिवार्य – नोएडा में कोई भी नया प्रोजेक्ट बिना EIA और सुप्रीम कोर्ट की ग्रीन बेंच की मंजूरी के शुरू नहीं होगा।
पारदर्शिता के कदम – SIT की रिपोर्ट मुख्य सचिव को दी जाएगी, नोएडा में मुख्य सतर्कता अधिकारी और नागरिक सलाहकार बोर्ड नियुक्त होंगे।
मुआवजे की गहन जांच – कोर्ट से अधिक भुगतान के कारण, जिम्मेदार अधिकारी और सांठगांठ की जांच होगी।
किसानों की सुरक्षा – मुआवजा पाने वाले किसानों के खिलाफ बिना कोर्ट की अनुमति कोई कार्रवाई नहीं होगी।
मंजूरी में तेजी – भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमे की मंजूरी 2 सप्ताह में दी जाएगी।
महानगर परिषद का सुझाव – नोएडा अथॉरिटी को महानगर परिषद में बदलने पर विचार।
मामले की जड़: 22 साल पुराना मुआवजा घोटाला
यह मामला नोएडा अथॉरिटी के कानूनी अधिकारी दिनेश कुमार सिंह और सहायक कानूनी अधिकारी वीरेंद्र सिंह नागर से जुड़ा है, जिन पर 2021 में 7.28 करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकृत करने का आरोप है, जो 22 साल पहले ही भुगतान हो चुका था।
नोएडा को महानगर परिषद क्यों?
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी की मौजूदा संरचना को "केंद्रीकृत और अपारदर्शी" बताते हुए कहा कि महानगर परिषद बनने से भ्रष्टाचार पर लगाम और जनता की भागीदारी बढ़ेगी।
किसानों और जनता के लिए राहत
यह फैसला किसानों और मध्यमवर्गीय फ्लैट खरीदारों के लिए बड़ी राहत है, जिन पर वर्षों से बिल्डरों और अधिकारियों की मनमानी का असर पड़ा। कोर्ट ने अनियोजित विकास पर रोक लगाने के लिए पर्यावरणीय मंजूरी को अनिवार्य किया।
अगला कदम
मामले की अगली सुनवाई 8 सप्ताह बाद होगी। SIT की रिपोर्ट कोर्ट मास्टर के पास सुरक्षित रखी जाएगी और नई टीम को गहराई से जांच कर दोषियों को सामने लाने की जिम्मेदारी दी गई है।