Manipur violence: मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसी से स्पष्ट जवाब मांगा है। अदालत ने सीबीआई को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा गया है कि पीड़ितों के परिजनों को आरोपपत्र की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं ताकि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी मिल सके।
जांच पर निगरानी
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि मामले की निगरानी मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश करेंगे। जरूरत पड़ने पर विशेष पीठ गठित करने का निर्देश भी दिया जा सकता है। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि राज्य में हालात अब पहले से शांत हैं और स्थानीय स्तर पर सुनवाई अधिक उपयुक्त हो सकती है।
समिति की रिपोर्टें
अदालत द्वारा नियुक्त समिति, जिसमें पूर्व न्यायाधीश शामिल हैं, हिंसा प्रभावितों के पुनर्वास और राहत उपायों पर कई रिपोर्ट प्रस्तुत कर चुकी है। इन रिपोर्टों में विस्थापित परिवारों की वापसी, मुआवजा और पुनर्वास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सुझाव दिए गए हैं। अदालत ने संकेत दिया कि पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सैकड़ों प्रभावित
मणिपुर में 3 मई 2023 को जातीय तनाव के बाद हिंसा भड़क उठी थी। विभिन्न समुदायों के बीच टकराव में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई और हजारों लोग विस्थापित हुए। हिंसा की पृष्ठभूमि में अनुसूचित जनजाति दर्जे की मांग और उसके विरोध से जुड़े घटनाक्रम बताए जाते हैं।
सीबीआई पर सवाल
एक पीड़िता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी ने आरोपपत्र दाखिल होने की जानकारी तक साझा नहीं की। उन्होंने अदालत में कहा कि कुछ मामलों में अभियुक्तों की पेशी और जांच की गंभीरता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों पर भी उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही है।