Supreme Court Now 38 judges: राज्यसभा ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने का रास्ता साफ हो गया है। यह विधेयक पहले ही लोकसभा से पारित हो चुका था और अब संसद की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी हो गई है।
बढ़ते मामलों को देखते हुए लिया गया फैसला
विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि न्यायपालिका पर लगातार बढ़ते काम के बोझ और नए संवैधानिक एवं कानूनी मामलों को देखते हुए जजों की संख्या बढ़ाना आवश्यक हो गया था। उन्होंने कहा कि इस कदम से मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और न्यायिक व्यवस्था की कार्यक्षमता मजबूत होगी।
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मई के अध्यादेश की जगह लेगा नया कानून
सरकार के अनुसार यह कानून मई 2026 में जारी उस अध्यादेश का स्थान लेगा, जिसके जरिए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया गया था। मेघवाल ने बताया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश ने बढ़ते नए मामलों और लंबित मुकदमों को देखते हुए अतिरिक्त न्यायाधीशों की आवश्यकता जताई थी। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाया जाता, तो हर वर्ष लंबित मामलों की संख्या और बढ़ सकती थी।
लंबित मामलों के निपटारे पर रहेगा जोर
सरकार का कहना है कि लंबित मामलों को कम करना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी दिशा में 1 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई और पुराने दीवानी तथा आपराधिक मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए चार विशेष पीठों का गठन भी किया गया। सरकार का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से न्याय तक लोगों की पहुंच और तेज होगी।